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राज
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शास्त्र तन्त्र भाषा इतिहास।
राज 1 year ago
कालः। अद्य शुक्रवारः १९४६:०३:शु:१४ । चन्द्रः ज्येष्ठा नक्षत्र। सूर्यः मिथुन राशि वर्षा ऋतु दक्षिणायन देवयान। बृहस्पतिः वृषभ राशि॥
राज 1 year ago
मतदाताओं को धन्यवाद।
राज 2 years ago
अवगूगलीकरण। वस्तुतः किसी भी लाभार्थ जालसेवासंस्था से मुक्त होना। गूगिल इत्यादि के दो बडे सुविधाएँ हैं। एक है जानकारी का संस्करण नियन्त्रण जिससे पूर्ववत रूपान्तरण सुलभ है। दूसरा जानकारी को अन्यत्र सुरक्षित रखना जिससे वह कोई दुर्घटना से मिट ना जाए। यदि अपनी सभी जानकारी सामान्य लेख प्रारूप में रखें तो गिट उपकरण द्वारा संस्करण नियन्त्रण स्वयम कर सकते हैं। यदि अपने पास दो भिन्न यन्त्र हैं जैसे एक संगणक और एक आण्ड्रोयिड विचलयन्त्र तो आरसिंक उपकरण से जानकारी स्वयम सुरक्षित रख सकते हैं। इस स्थिति में गूगिल इ॰ के सम्पर्कसूची दिनदर्शिका जालसंदेशग्राहक जैसे क्रमकों के स्थान पर ईमाक्स जैसा एक लेखसम्पादक ही पर्याप्त। सरल नहीं पर सम्भाव्य॥ संलग्नित संलाप हास्यवादी॥ गूगिल के जालसंचारक प्लेयस्टोर इ॰ के लिए मुक्त विकल्प उपलब्ध हैं। खोज यूट्यूब तथा यात्रा मार्गदर्शन सेवाएँ अभी भी निर्विकल्प।
राज 2 years ago
मादकद्रव्य आखेट। बीस तीस वर्ष पूर्व चीनिस्तान में मादक द्रव्य उत्पादक तथा तस्करों की एक हिंसक कहानी। आधुनिक नगरों से बाहर तथा कार्यालयों से दूर जीवन का अच्छा चित्रण। इसमें एक विशेष बात है कि मुख्य महिला अभिनयकर्ता यौआन्ना ह्वावेय संस्था के संस्थापक रेनजंगफेय की बेटी हैं तथा मंगवानझौ की छोटी बहन। आखेट का परिणाम जैसा अपेक्षित। कोई भी बचता नहीं।
राज 2 years ago
कालचक्र। अमेरिकी चलचित्र सोर्सकोड का चीनिस्तानी संस्करण। एक समूहयान दुर्घटना का निरन्तर कालचक्र में दो लोग फँस जाते हैं। दुर्घटना के पीछे रहस्य सुलझाने से ही वे अपने जीवन बचा सकेंगे। जहाँ सोर्सकोड में दुर्घटना केवल सामान्य आतंकवाद था यहाँ कुछ सामाजिक विषय तथा न्याय की बात है। इसलिए कहानी अधिक गहन। कुछ वास्तविक दुर्घटना से प्रेरित लगता है जिसके कारण कुछ लोगों के लिए संवेदनशील विषय हो सकता है। युवक ही नहीं वयस्कजन के लिए भी हितोपदेशी। अन्य वास्तविकतावादी चीनिस्तानी कहानियों से भिन्न इसका अन्त हर्षदायक बनाया गया। लगभग दस घण्टे कुल।
राज 2 years ago
वाद्यम्। रिम्तिम्तगीदिम अष्टक विकार।
राज 2 years ago
गीतम्। इतिहिवीथी।
राज 2 years ago
इस उपाय में एक समस्या है। शास्त्र परम्परा में कुछ विषयवस्तुओं की सार्वजनिक शिक्षा का स्पष्ट निषेध है। मुख्यतः वेद मन्त्र प्रणव युक्त मन्त्र कर्मकाण्ड इत्यादि। परन्तु संस्कृत में लौकिक विषयवस्तुओं की सार्वजनिक शिक्षा की अनुमति का प्रमाण भी उपलब्ध है। चिकित्साशास्त्र के मान्य ग्रन्थ सुश्रुतसंहिता के शिष्योपनीयम अध्याय में यह कहा गया। ॰मंत्रवर्ज्यमनुपनीतमध्यापयेत्॰। चाणक्य का अर्थशास्त्र भास्कराचार्य के गणित तथा खगोलशास्त्र इत्यादि भी लौकिक विषयवस्तु हैं। स्वमत है कि इस आध्यात्मिक लौकिक विषयवस्तु विभाजन से भाषा में संस्कृत युक्त सार्वजनिक सर्वसमान शिक्षा सम्भाव्य। तथा पर्याप्त भी।
राज 2 years ago
प्र॰। भाषा की भ्रष्टता से कैसे बचें। उ॰। पहले भाषा का संस्कृत से सम्बन्ध समझना चाहिए। जैसे शरीर में मांस तथा हड्डियाँ दोनों है। पर समान नहीं। हड्डियों से शरीर टिकता है। मांस से शरीर चलता है। हड्डी स्वयम चल नहीं सकता। मांस स्वयम टिक नहीं सकता। वैसे ही संस्कृत टिकता है। हिन्दी चलती है। पर संस्कृत बिना हिन्दी टिकेगी नहीं। हिन्दी बिना संस्कृत चलेगा नहीं। भाषा को संस्कृत से पृथक करना दोनों को मारने का प्रयास है। भाषा की भ्रष्टता से बचने का एक ही उपाय। भाषा में संस्कृत का प्रयोग।
राज 2 years ago
शब्दावली। अमेथिस्ट क्रमक के अनुवाद में प्रयुक्त। टीका अथवा पत्र प्रकाशन। कचरालेख। पुनःप्रसारक तथा ग्राहक। विभेदक। लेखाएँ। ग्राहकताएँ। आद्यताएँ। समयांकन प्रवेशांकन निर्गमनांकन। पारणशब्द। प्रमाणीकरण। ख्याप्य तथा गुप्त अथवा निजी कुंचिका। अष्टक। षोडशांकरूप। टाँकाफलक। रहस्यीकरण। जैविकमात्राएँ। पररूपण। स्मारकचिह्न। इष्ट। प्रपत्रस्थान। अभिलेख सेवासंगणक। संकुचित अभिलेख। घुण्डी टाँकें। प्रगतिमान पट्टी। मार्गदर्शन पट्टियाँ। विषयसूचक। तत्क्षणप्रसार। पण्यक्षेत्र। पूर्वीक्षण। पृष्ठघुमाव। प्रयोगमाध्यम शैली। प्रेषण प्रेषक संयुक्तप्रेषण। समावृत संदेश। संयोजन। मध्यस्थ। प्रत्याह्वान जालपता। पीठशय्यादि। विद्युत्कणयन्त्र। संग्रहार्थ। धनकोष। उपहारकोषयुक्त। ज्साप तथा ज्सापोपार्जन योजना। टकसाल। श्रमप्रमाण। लिपिखण्ड। बिटकोयिन खण्डश्रृंखला। लैटनिंग चालान।
राज 2 years ago
नहि। न च हि च। निषेधः। अभावेनह्यनोनापि। इत्यमरः। यथा। ॰नहिनहिनहीत्येवकुरुते। इत्युद्भटः। हिन्दी में निषेधार्थक अव्यय चन्द्रबिन्दु युक्त नहीँ। संभवतः हाँ के जैसे। शिरोरेखा के ऊपर ई मात्रा होने के कारण सरलीकृत बिन्दु युक्त नहीं॥ हि। निश्चयार्थक अव्यय। हिन्दी में ही॥ हाँ। आम्॥
राज 2 years ago
ध्यातव्य। शक कालगणना में क्रोधी संवत्सर आज से चल रहा है। अर्थात श॰ १९४७ वर्ष का संवत्सर नाम है। पर सामान्यतः लिखने में गत वर्ष अर्थात १९४६ ही लिखा जाता है दिनांक इत्यादि में॥ कालः। अद्य १९४६ तमेशकाब्दगते १९४७ तमेशकाब्दे क्रोधीसम्वत्सरे चैत्रशुक्लप्रतिपदा। मंगलवारः १९४६:०१:शु:०१ ॥