जयशंकर बोले-भारत नहीं चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार:नेचुरल गैस खरीद में EU सबसे आगे; फिर भारत पर हाई टैरिफ समझ से परे
भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने गुरुवार को मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार नहीं है, बल्कि चीन है। रूस से LNG (नेचुरल गैस) खरीदने के मामले यूरोपीय यूनियन (EU) सबसे आगे है। वहीं, 2022 के बाद रूस के साथ ट्रेड बढ़ाने में भी कुछ दक्षिणी देश भारत से आगे हैं। फिर भी भारत पर हाई टैरिफ समझ से परे है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जो 27 अगस्त से लागू होगा। ट्रम्प का कहना है कि भारत के तेल खरीदने से रूस को यूक्रेन जंग लड़ने में मदद मिल रही है। दोनों देश व्यापार घाटा कम करने पर भी काम करेंगे जयशंकर ने भारत की जरूरतों के आधार पर रूस तेल की खरीद को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद भारत और रूस का रिश्ता दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में से एक रहा है। दोनों देशों ने व्यापार संतुलित करने के लिए भारत से रूस को कृषि, मेडिसन और कपड़े का इंपोर्ट बढ़ाने पर सहमति जताई। जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस व्यापार में नॉन-टैरिफ दिक्कतों को हटाने और रेगुलेशन समस्याओं को जल्द सुलझाने के लिए काम करेंगे। इससे भारत का इंपोर्ट बढ़ेगा और ट्रेड डेफिसिट (व्यापार असंतुलन) कम होगा। भारत को रूसी तेल खरीद पर 5% छूट मिल रही रूसी डिप्लोमेट रोमन बाबुश्किन ने एक दिन पहले यानी बुधवार को कहा था कि रूस के कच्चे तेल का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि ये बहुत सस्ता है। उन्होंने कहा था- रूसी कच्चे तेल पर भारत को करीब 5% की छूट मिल रही है। भारत इस बात को समझता है कि तेल आपूर्ति को बदलने का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि इससे उसे बहुत ज्यादा मुनाफा हो रहा है। भारत पर अमेरिकी दबाव को भी रूस ने गलत बताया है। भारत, चीन के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से सिर्फ 0.2% (68 हजार बैरल प्रतिदिन) तेल इम्पोर्ट करता था। मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया, जबकि 2025 में जनवरी से जुलाई तक भारत हर दिन रूस से 17.8 लाख बैरल तेल खरीद रहा है। पिछले दो साल से भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का रूसी तेल खरीद रहा है। रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा भारत बाबुश्किन ने कहा- भारत के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन हमें भारत के साथ अपने रिश्तों पर भरोसा है। हमें विश्वास है कि बाहरी दबाव के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। उन्होंने ने ये भी कहा कि अगर भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में नहीं जा सकते, तो वे रूस की तरफ जा सकते हैं। रूसी सेना में काम कर रहे भारतीय का मुद्दा भी उठाया जयशंकर ने सर्गेई लावरोव के साथ बैठक में रूसी सेना में काम कर रहे भारतीयों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई भारतीयों को रिहा किया जा चुका है, लेकिन ऐसे कुछ मामले अभी भी बने हुए हैं। जयशंकर ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान जैसे मुद्दों पर बातचीत की। भारत ने शांति के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया। ---------------------------------------------- यह खबर भी पढ़ें... रूस बोला- हमारे कच्चे तेल का कोई विकल्प नहीं:भारत को 5% डिस्काउंट में दे रहे; अमेरिका के 50% टैरिफ को गलत बताया रूस का कहना है कि उसके कच्चे तेल का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि ये बहुत सस्ता है। आज यानी, 20 अगस्त को सीनियर रूसी डिप्लोमेट रोमन बाबुश्किन ने ये बात कही। उन्होंने कहा- रूसी कच्चे तेल पर भारत को करीब 5% की छूट मिल रही है। भारत इस बात को समझता है कि तेल आपूर्ति को बदलने का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि इससे उसे बहुत ज्यादा मुनाफा हो रहा है। भारत पर अमेरिकी दबाव को भी रूस ने गलत बताया है। यहां पढ़ें पूरी खबर...
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माइक्रोसॉफ्ट हेडक्वाटर से 18 लोग गिरफ्तार:इजराइल के साथ हुई डील के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे; भारतीय कर्मचारी को भी निकाल चुकी कंपनी
माइक्रोसॉफ्ट के वाशिंगटन हेडक्वाटर में प्रदर्शन करने वाले 18 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नो अजूर फॉर अपार्थाइड ग्रुप से जुड़े ये लोग माइक्रोसॉफ्ट के इजराइल के साथ हुए क्लाउड कॉन्ट्रैक्ट के खिलाफ ऑफिस के अंदर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के लोगो पर लाल रंग छिड़का और नारे लगाए। प्रोटेस्ट के प्रदर्शनकारी ऑफिस छोड़ने से इंकार कर रहे, इस वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने 2021 में इजराइल सरकार के साथ लगभग 1.2 बिलियन डॉलर की क्लाउड सर्विस डील की थी, जिसे 'प्रोजेक्ट निंबस' नाम दिया गया है। इस डील से माइक्रोसॉफ्ट के कई कर्मचारी नाराज हैं। उनका मानना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल सैन्य ऑपरेशंस या निगरानी के लिए हो सकता है, खासकर गाजा जैसे विवादित क्षेत्रों में। माइक्रोसॉफ्ट बोला- टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल नहीं हो रहा माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि उसने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एक लॉ फर्म को जांच के लिए नियुक्त किया है। कंपनी का दावा है कि उसकी तकनीकों का गाजा में नागरिकों के खिलाफ दुरुपयोग नहीं हुआ है। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने मानवाधिकार मानकों और सेवा शर्तों का उल्लंघन करने वाले किसी भी उपयोग को रोकने की बात कही है। हालांकि, प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि कंपनी इजराइल के साथ सभी कॉन्ट्रैक्ट खत्म करे, क्योंकि उन्हें लगता है कि तकनीक का इस्तेमाल फिलिस्तीनियों के खिलाफ हो रहा है। भारतीय मूल की कर्मचारी को निकाल चुकी माइक्रोसॉफ्ट इससे पहले अप्रैल में माइक्रोसॉफ्ट ने 50वें स्थापना दिवस के इवेंट में विरोध प्रदर्शन करने वाले दो कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इनमें भारतीय मूल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर वानिया अग्रवाल भी शामिल थी। दोनों कर्मचारियों ने कंपनी पर इजराइली सेना को AI टेक्नोलॉजी बेचकर नरसंहार में शामिल होने का आरोप लगाया था। शुक्रवार को माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला, बिल गेट्स और स्टीव वॉल्मर के सेशन के दौरान इब्तिहाल अबूसाद और वानिया अग्रवाल ने विरोध प्रदर्शन किया था। इवेंट में इब्तिहाल अबूसाद ने चिल्लाकर कहा, माइक्रोसॉफ्ट इजराइल को AI हथियार बेच रही है, इससे 50,000 लोग मारे जा चुके हैं।
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सुनीता के स्पेसक्राफ्ट की 28000 KMPH से वातावरण में एंट्री:घर्षण से तापमान 1600 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था; VIDEO में पूरा सफर
भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स 9 महीने 14 दिन बाद पृथ्वी पर लौट आई हैं। उनका ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भारतीय समयानुसार सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के पास एटलांटिक सागर में लैंड हुआ। सुनीता के साथ 3 और एस्ट्रोनॉट्स धरती पर लौटें। VIDEO के जरिए देखे सुनीता विलियम्स का सफर...
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भास्कर वर्ल्ड अपडेट्स:ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति बोलसोनारो पर तख्तापलट की कोशिश का आरोप, 2022 में चुनाव हारे थे
ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो पर 2022 में चुनावी हार के बाद सत्ता में बने रहने के लिए तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। मंगलवार को प्रोसीक्यूटर जनरल पाउलो गोनेट ने बोलसोनारो और 33 अन्य लोगों आरोप लगाए। आरोप है कि इस प्लान में वर्तमान राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को जहर देने और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एलेक्जांद्रे डी मोराइश की हत्या करने की साजिश करना शामिल था।
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ट्रम्प का भारतीय चुनाव में अमेरिकी फंडिंग पर सवाल:कहा- उनके पास बहुत पैसा, हम 182 करोड़ क्यों दे रहे; मस्क ने रोक लगाई थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत में मतदान को बढ़ाने के लिए मिलने वाली 182 करोड़ रुपए की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, हम भारत को 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर क्यों दे रहे हैं? उनके पास बहुत ज्यादा पैसा है। भारत दुनिया के सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक हैं, खासतौर पर हमारे लिए। ट्रम्प के सहयोगी इलॉन मस्क ने शनिवार को भारत को दी जाने वाली 182 करोड़ रुपए की फंडिंग रद्द कर दी । मस्क के नेतृत्व वाले डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) ने शनिवार को ये फैसला लिया। DOGE ने एक लिस्ट जारी की है। इसमें डिपार्टमेंट की तरफ से 15 तरह के प्रोग्राम्स की फंडिंग रद्द की गई है। इसमें एक प्रोग्राम दुनियाभर में चुनाव प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए भी है, जिसका फंड 4200 करोड़ रुपए है। इस फंड में भारत की हिस्सेदारी 182 करोड़ रुपए की है। DoGE ने पोस्ट किया- अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों पर होने वाले सभी खर्चे रद्द BJP ने चुनाव में फंडिंग पर सवाल उठाए BJP नेता अमित मालवीय ने DOGE के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। इसमें उन्होंने भारत के चुनाव में 182 करोड़ की फंडिंग को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने X पोस्ट में कहा- 21 मिलियन डॉलर (182 करोड़ रुपए) वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए? यह साफ तौर पर देश की चुनावी प्रक्रिया में बाहरी दखल है। इस फंड से किसे फायदा होगा। जाहिर है इससे सत्ताधारी (BJP) पार्टी को तो फायदा नहीं होगा। एक दूसरे पोस्ट में अमित मालवीय ने कांग्रेस पार्टी और जॉर्ज सोरोस पर भारतीय चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। मालवीय ने सोरोस को गांधी परिवार का जाना-माना सहयोगी बताया। मालवीय ने X पर लिखा कि 2012 में एसवाई कुरैशी के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स (IFES) के साथ एक MoU साइन किया था। ये संस्था जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से जुड़ा है। इसे मुख्य तौर पर USAID से आर्थिक मदद मिलती है। भाजपा प्रवक्ता की पोस्ट में पूर्व इलेक्शन कमिश्नर, कांग्रेस और सोरोस पर आरोप कुरैशी बोले- रिपोर्ट में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं कुरैशी ने कहा- ''2012 में मेरे चुनाव आयुक्त रहते अमेरिकी एजेंसी की तरफ से भारत में मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए करोड़ों डॉलर की फंडिंग वाली मीडिया रिपोर्ट में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।'' SY कुरैशी ने बताया कि जब वे 2012 में मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तब IFES के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन हुआ था। चुनाव आयोग ने ऐसा ही समझौता कई अन्य एजेंसियों और इलेक्शन मैनेजमेंट बॉडीज के साथ किया था। यह समझौता इसलिए किया था गया था ताकि चुनाव आयोग के ट्रेनिंग और रिसोर्स सेंटर यानी इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) में इच्छुक देशों को ट्रेनिंग दी जा सके। कुरैशी ने कहा कि MoU में साफ तौर से कहा गया था कि किसी भी पक्ष पर किसी भी तरह की वित्तीय और कानूनी जिम्मेदारी नहीं होगा। यह शर्त दो अलग-अलग जगह पर रखी गई थी, ताकि किसी भी अस्पष्टता की गुंजाइश न रहे। इस MoU को लेकर किसी भी तरह धनराशि का जिक्र पूरी तरह से झूठ। बता दें कि MoU दो या दो से ज्यादा पक्षों के बीच हुए समझौते का दस्तावेज ज्ञापन होता है। इस ज्ञापन में एक साझा कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जाती है और साथ मिलकर काम करने के लिए तय की गई बातें दर्ज होती हैं। बांग्लादेश को मिलने वाली फंडिंग भी बंद DoGE की तरफ से जारी की गई लिस्ट में बांग्लादेश को मिलने वाली 251 करोड़ रुपए की फंडिंग भी शामिल है। यह फंड बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल को मजबूत करने के लिए दिया जा रहा था। यह फंडिंग ऐसे समय में रोकी गई है, जब बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार गिराने में अमेरिका के डीप स्टेट को संदिग्ध माना जा रहा है। जब मोदी की अमेरिका विजिट के दौरान ट्रम्प से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन में अमेरिका का हाथ नहीं है। ट्रम्प ने कहा, इसमें हमारे डीप स्टेट का कोई रोल नहीं था। यह ऐसी बात है, जिस पर भारतीय पीएम लंबे समय से काम कर रहे हैं। इस पर कई साल से काम हो रहा है। मैं इसके बारे में पढ़ता रहा हूं, लेकिन बांग्लादेश के मुद्दा पर पीएम मोदी बात करें तो बेहतर होगा। हालांकि, ये साफ नहीं है कि ट्रम्प ने भारत की तरफ से कौन से काम का जिक्र किया था। इसके बाद पीएम मोदी और ट्रम्प की मुलाकात हुई, जिसमें दोनों ने बांग्लादेश के हालात पर चर्चा की थी। -------------------- मस्क से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... अमेरिकी इन्फ्लुएंसर का दावा- मस्क मेरे बच्चे के पिता:बच्चे की सेफ्टी के लिए पहले नहीं बताया; मस्क के पहले से 12 बच्चे अमेरिकी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और राइटर एश्ले सेंट क्लेयर ने दावा किया है कि वे टेस्ला कंपनी के मालिक इलॉन मस्क के बेटे की मां हैं। क्लेयर ने कहा कि उसने 5 महीने पहले सीक्रेट तौर पर इस बच्चे को जन्म दिया है, लेकिन सेफ्टी और प्राइवेसी के चलते पहले इसकी घोषणा नहीं की। पूरी खबर यहां पढ़ें...
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मस्क ने मोदी को स्पेसशिप का कवच दिया:ये अंतरिक्षयान को भीषण तापमान से बचाता है; मोदी ने मैक्रों की पत्नी को आइना गिफ्ट किया
फ्रांस और अमेरिका दौरे पर गए पीएम मोदी को कई गिफ्ट मिले और उन्होंने भी कई गिफ्ट दिए।अमेरिकी बिजनेसमैन इलॉन मस्क ने मोदी को स्पेसएक्स की स्टारशिप फ्लाइट टेस्ट 5 का हीट शील्ड यानी कवच से बना मोमेंटो दिया। ये कवच अंतरिक्षयान को भीषण तापमान से बचाता है। मोदी ने मस्क के बच्चों को रवींद्रनाथ टैगोर की द क्रिसेंट मून, द ग्रेट आरके नारायण कलेक्शन और विष्णु शर्मा की पंचतंत्र किताब उपहार में दी। वहीं राष्ट्रपति ट्रम्प ने पीएम मोदी को एक किताब अवर जर्नी टुगेदर गिफ्ट की। 320 पन्नों की इस किताब में '2019 में हुए हाउडी मोदी' और ' 2020 में हुए नमस्ते ट्रम्प' प्रोग्राम की तस्वीरें हैं। मस्क ने दिया स्टारशिप का हीट टाइल मोमेंटो मस्क के बच्चों को पंचतंत्र समेत तीन किताब गिफ्ट की राष्ट्रपति ट्रम्प ने पीएम मोदी को किताब गिफ्ट दी फ्रांस में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बच्चों को गिफ्ट फ्रांस के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को मूर्ति और मिरर का गिफ्ट --------------------------------------------------- यह खबर भी पढ़िए... PM मोदी अमेरिका से दिल्ली रवाना:ट्रम्प बोले- मोदी मुझसे बेहतर नेगोशिएटर, भारत को F-35 फाइटर जेट देने के लिए अमेरिका तैयार PM नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा खत्म कर दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। PM मोदी शुक्रवार देर रात 3 बजे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे। दोनों नेता करीब ढाई घंटे तक साथ रहे। इस दौरान दोनों के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। ट्रम्प-मोदी ने 2 बार मीडिया से बात की। यहां पढ़ें पूरी खबर...
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यूक्रेन का दावा- रूस ने चेर्नोबिल पर ड्रोन अटैक किया:राष्ट्रपति जेलेंस्की बोले- रेडिएशन रोकने के लिए बनाई गई कॉन्क्रीट शील्ड को नुकसान पहुंचा
यूक्रेन के चेर्नोबिल एटॉमिक प्लांट पर गुरुवार रात को ड्रोन हमला हुआ। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस अटैक का आरोप रूस पर लगाया है। जेलेंस्की ने कहा कि गुरुवार देर रात विस्फोटकों से लैस एक रूसी ड्रोन ने चेर्नोबिल प्लांट के कॉन्क्रीट से बने सेफ्टी कवच पर हमला किया। जेलेंस्की के मुताबिक, यह हमला तबाह हो चुके पावर रिएक्टर नंबर- 4 पर किया गया। हमले के चलते इमरात में आग लग गई थी, जिसे बुझा दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि 1986 में हुए ब्लास्ट के बाद रेडिएशन रोकने के कॉन्क्रीट की एक शील्ड बनाई गई थी। हमले से इसी शील्ड पर नुकसान पहुंचा है। अभी तक रेडिएशन का लेवल बढ़ने की कोई खबर नहीं है। वोलोदिमीर जेलेंस्की ने VIDEO पोस्ट किया
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें चेर्नोबिल प्लांट की इमारत से तेज रोशनी निकलती दिख रही है। इसके बाद पूरा आसमान धुएं से भर जाता है। इंटरनेशल एटॉमिक एनर्जी ने बताया कि यूक्रेन में रात करीब 2 बजे यह हमला किया गया। 1986 में हुआ था चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट में ब्लास्ट
26 अप्रैल 1986 में चेर्नोबिल के न्यूक्लियर पावर प्लांट में ब्लास्ट हुआ था। यहां काम कर रहे 32 कर्मचारियों की मौत हो गई थी। सैकड़ों कर्मचारी रेडिएशन की चपेट में आ गए थे। तब रूस नहीं सोवियत संघ होता था। इस ब्लास्ट में मारे गए लोगों की सही संख्या आज नहीं नहीं पता चल सकी है। हालांकि, 50 लाख लोग प्लांट में हुए हादसे से निकले रेडिएशन का शिकार बने थे। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह से 4,000 से भी अधिक लोगों की मौत हुई। सोवियत संघ ने हमले को छिपाने की कोशिश की थी, लेकिन स्वीडिश रिपोर्ट आने के बाद विस्फोट की बात मानी गई। सोवियत संघ के बंटवारे के बाद चेर्नोबिल यूक्रेन के हिस्से आ गया था। एक जांच के दौरान हुआ था यह विस्फोट
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ट्रम्प दोस्त या खतरा, सवाल पर जयशंकर का जवाब:वे भारत के लिए आउट ऑफ सिलेबस, मोदी के साथ उनके अच्छे रिश्ते
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ‘अमेरिकी राष्ट्रवादी बताया है और कहा है कि उनकी कुछ नीतियां भारत के लिए आउट ऑफ सिलेबस हो सकती हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में गुरुवार को एक डायलॉग सेशन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते मजबूत हैं। विदेश मंत्री से डॉयलॉग सेशन में सवाल पूछा गया कि ट्रम्प को आप भारत के लिए किस रूप में देखते हैं- एक दोस्त या फिर खतरा? इस पर जयशंकर ने कहा- (मुस्कुराते हुए) भाई अभी उनके मेहमान बनके आए हैं। उनके शपथ ग्रहण में गए थे। अच्छा ट्रीटमेंट दिया हमको। अब उसी का अपना मैसेज होता है न। जयशंकर ने आगे कहा- वे (ट्रम्प) राष्ट्रवादी हैं। ट्रम्प को लगता है कि अमेरिका ने पिछले 80 साल से पूरी दुनिया की एक तरीके से जिम्मेदारी ले रखी है। यह फिजूल है। जो दुनिया पर खर्च होता है, वह अमेरिका में होना चाहिए। ये उनकी सोच है। रही बात हमारी तो भारत के संबंध अमेरिका से अच्छे हैं। मोदी जी के ट्रम्प से व्यक्तिगत संबंध हैं। जयशंकर बोले- अब गैर-भारतीय भी खुद को भारतीय कहते हैं
जयशंकर ने यह माना कि ट्रम्प की कई नीतियां वैश्विक मामलों में अहम बदलाव ला सकती हैं। विदेश मंत्री ने कहा, वह बहुत सी चीजें बदलेंगे। हो सकता है कि कुछ चीजें आउट ऑफ सिलेबस हों लेकिन हमें देश के हित में विदेश नीतियों के संदर्भ में खुला रहना होगा । उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दे हो सकते हैं जिन पर हम एकमत न हों लेकिन कई क्षेत्र ऐसे होंगे जहां चीजें हमारे दायरे में होगी। सत्र के दौरान, जयशंकर ने भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और देश के बारे में बदलती धारणाओं के बारे में बात की। उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि अब गैर-भारतीय भी खुद को भारतीय कहते हैं, उन्हें लगता है कि इससे उन्हें विमान में सीट मिल जाएगी’ राजनीति में आने को लेकर कहा- ये बस एक संयोग
जयशंकर ने शिक्षा क्षेत्र से नौकरशाह बनने और फिर राजनीति में आने को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा- मैंने कभी नहीं सोचा था कि ब्यूरोक्रेट बनूंगा। पॉलिटिक्स में मेरी एंट्री बस एक संयोग था, अब इसे भाग्य कहें, या मोदी कहें। उन्होंने (पीएम मोदी) इस तरह से मुझे आगे बढ़ाया कि मना नहीं कर सका।" जयशंकर ने यह भी कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अभी भी अपनी सहायता के लिए भारत पर ही निर्भर हैं। उन्होंने कहा, 'जो भी देश के बाहर जाते हैं, वे हमारे पास ही आते हैं। बाहर हम ही रखवाले हैं। ' ............................................... जयशंकर से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें... अमेरिका में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक:जयशंकर की अमेरिकी विदेश मंत्री और NSA से मुलाकात; द्विपक्षीय बातचीत की भारतीय विदेशमंत्री जयशंकर ने अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की शपथ के बाद मंगलवार को क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। नए ट्रम्प प्रशासन में होने वाली ये पहली बड़ी बैठक थी। इसमें मीटिंग में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया। पूरी खबर यहां पढ़ें...
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काश पटेल बोले- मुझे लोगों ने नस्लीय गाली दी:सीनेट में बयान दिया; जय श्री कृष्णा से स्पीच शुरू की, कलावा पहने नजर आए
ट्रम्प प्रशासन में FBI डायरेक्टर के लिए चुने गए काश पटेल ने गुरुवार को सीनेट में बताया कि उन्हें नस्लवाद का सामना करना पड़ा था। FBI डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति के लिए काश पटेल को सीनेट से मंजूरी लेनी है। इसे लेकर सुनवाई चल रही है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पटेल से पूछा कि, "क्या उन्होंने कभी व्यक्तिगत रूप से नस्लवाद का अनुभव किया है।" इस पर सीनेट की ज्यूडिशियरी कमेटी के सामने पटेल ने कहा कि, दुर्भाग्य से उन्हें इसका सामना करना पड़ा है। पटेल ने बताया कि 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल में हुई हिंसा की जांच के दौरान उन्होंने कमेटी के सामने बयान दिए थे। कांग्रेस (अमेरिकी संसद) ने उनकी निजी जानकारियां सार्वजनिक कर दी थी। इसके बाद पटेल को जान से मारने की धमकियां मिली। साथ ही उन्हें डिटेस्टेबल सेंड निगर कहा गया। यह एक नस्लभेदी गाली है जिसका इस्तेमाल मिडिल ईस्ट, नॉर्थ अफ्रीका और साउथ एशिया के लोगों को अपमानित करने के लिए किया जाता है। जय श्री कृष्णा से स्पीच की शुरुआत की गुरुवार को सीनेट में सुनवाई के दौरान काश पटेल ने अपनी स्पीच की शुरुआत 'जय श्री कृष्णा' के नारे से की। वे कलावा पहने हुए नजर भी आए। उन्होंने वॉशिंगटन डीसी में प्लेन और हेलिकॉप्टर के क्रैश में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त की। सुनवाई के दौरान उनके माता-पिता सीनेट में मौजूद थे। काश पटेल की मां अंजना पटेल और पिता विनोद पटेल भारत से अमेरिका पहुंचे थे। उनकी बहन और परिवार के दूसरे लोग भी वहां मौजूद थे। पटेल ने माता-पिता और परिवार के अन्य लोगों का सीनेट में स्वागत भी किया। पटेल ने FBI डायरेक्टर के तौर पर नॉमिनेट करने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प का धन्यवाद भी किया। कैपिटल हिल हिंसा के आरोपियों की माफी पर ट्रम्प से अलग राय काश पटेल ने सुनवाई के दौरान कैपिटल हिल हिंसा के आरोपियों को ट्रम्प के माफी देने के फैसल का विरोध किया। सीनेट में सुनवाई के दौरान पटेल ने कहा, वह ट्रम्प के सजा में छूट के फैसले का विरोध करते हैं , जिसके तहत 6 जनवरी के सैकड़ों दंगाइयों को जेल से रिहा कर दिया गया, जिन्होंने पुलिस अधिकारियों पर हमला किया था। ट्रम्प ने 20 जनवरी को शपथ लेने के बाद कैपिटल हिल हिंसा के 1200 से ज्यादा आरोपियों को माफ करने का ऐलान किया। साथ ही 14 दोषियों को सजा में छूट भी दी है। इन आरोपियों ने 6 जनवरी 2021 को संसद पर चढ़ाई कर पुलिस वालों पर हमले किए थे। पटेल ने कहा कि लॉ एनफोर्समेंट (कानून प्रवर्तन) एजेंसियों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। ----------------------- पूरी खबर यहां पढ़ें.... काश पटेल ने ट्रम्प के पिछले कार्यकाल में इंटेलिजेंस में काम किया: गुजराती परिवार से ताल्लुक रखते हैं, अब FBI डायरेक्टर बनेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जांच एजेंसी ‘फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन' (FBI) के अगले डायरेक्टर के लिए नवंबर में भारतवंशी कश्यप काश पटेल के नाम की घोषणा की थी। इससे पहले काश पटेल ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान रक्षा मंत्रालय में चीफ ऑफ स्टाफ, नेशनल इंटेलिजेंस में डिप्टी डायरेक्टर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में आतंकवाद विरोधी कार्यक्रमों के सीनियर डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें...
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ट्रम्प का सरकारी कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर:6 फरवरी तक इस्तीफा देना होगा, 8 महीने की सैलरी मिलेगी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सरकारी कर्मचारियों की संख्या को कम करने के लिए काम शुरू कर दिए हैं। ट्रम्प प्रशासन ने मंगलवार को संघीय कर्मचारियों को बायआउट करने यानी खुद से नौकरी छोड़ने का ऑफर दिया है। इसके लिए एक हफ्ते यानी 6 फरवरी तक का समय दिया गया है। नौकरी छोड़ने के बदले कर्मचारियों को 8 महीने का अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। सरकारी नौकरियों में भर्ती करने वाले कार्मिक विभाग ने भविष्य में कर्मचारियों की छंटनी की चेतावनी भी दी है। लाखों कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि जो लोग अपनी मर्जी से पद छोड़ेंगे, उन्हें लगभग आठ महीने का वेतन मिलेगा, लेकिन उन्हें 6 फरवरी तक ये विकल्प चुनना होगा। संघीय सरकार में 30 लाख से ज्यादा कर्मचारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक संघीय कर्मचारियों की संख्या 30 लाख से ज्यादा है। ये अमेरिकी की 15वीं सबसे बड़ी वर्कफोर्स हैं। प्यू रिसर्च के मुताबिक एक संघीय कर्मचारी का औसत कार्यकाल 12 साल का होता है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक वेटरन्स अफेयर्स डिपार्टमेंट में काम करने वाले हेल्थ वर्कर्स, घर या बिजनेस के लिए लोन प्रोसेस करने वाले अधिकारी और सेना के लिए हथियार खरीदने वाले ठेकेदार सभी एक साथ बाहर निकल सकते हैं। फूड और वाटर सप्लाई की जांच करने वाले वैज्ञानिकों को भी अपनी नौकरी खोनी पड़ सकती है।
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