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ट्रम्प की 100% टैरिफ धमकी पर कनाडाई पीएम की सफाई:बोले- चीन के करीब नहीं जा रहे; हमारे बीच कोई फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोमवार को कहा है कि उनकी सरकार चीन के साथ किसी भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई व्यापार समझौता करने का कोई इरादा भी नहीं है। कार्नी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की कड़ी चेतावनी के एक दिन बाद आया है। ट्रम्प ने कहा था कि अगर कनाडा चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता करता है तो कनाडाई सामानों पर 100% टैरिफ लगा दिया जाएगा। कार्नी ने कहा, "हम कनाडा-अमेरिका-मेक्सिको समझौता (CUSMA) के तहत हम किसी गैर-बाजार अर्थव्यवस्था वाले देश के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने से पहले सूचना देंगे। हमारा चीन या किसी दूसरे ऐसे देश के साथ ऐसा ट्रेड करने का कोई इरादा नहीं है।" ट्रम्प ने कनाडा पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक के बाद एक पोस्ट में कनाडा को चेतावनी दी थी कि अगर वह चीन के साथ गहरा व्यापार संबंध बढ़ाता है तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रम्प ने कहा कि अगर कार्नी ये सोचते हैं कि वे कनाडा को चीन का ऐसा रास्ता बना देंगे जहां से चीन अपना सामान अमेरिका भेज सके तो वे गलत हैं। ट्रम्प ने कहा कि चीन, कनाडा को पूरी तरह नुकसान पहुंचा देगा। चीन, कनाडा के कारोबार, समाज और जीवनशैली को खत्म कर देगा और देश को पूरी तरह निगल जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि अगर कनाडा ने चीन के साथ कोई समझौता किया, तो अमेरिका तुरंत कनाडा से आने वाले सभी सामानों पर 100% टैरिफ लगा देगा। ट्रम्प ने शुक्रवार को भी कहा था कि चीन, कनाडा को एक साल के अंदर ही खा जाएगा। दरअसल, कनाडा के PM मार्क कार्नी ट्रम्प के 'गोल्डन डोम' मिसाइल प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प इससे नाराज हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा हमारे बजाय चीन से दोस्ती बढ़ा रहा, जो उन्हें पहले ही साल में बर्बाद कर देगा। कनाडा पर आरोप लगाते हुए ट्रम्प ने कहा कि वह नॉर्थ अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है। कनाडा-चीन के व्यापार समझौते से नाराज हुए थे ट्रम्प कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चीन की यात्रा की और वहां व्यापार समझौते किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प इससे नाराज बताए जा रहे हैं। करीब एक साल पहले कार्नी खुद चीन को कनाडा के सामने “सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा” बता चुके थे, लेकिन एक साल बाद हालात बदल चुके हैं। चीन दौरे पर उन्होंने कई अहम करार किए हैं। इसमें कनाडा, चीन की इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) पर लगाए गए टैरिफ को कम करेगा। कनाडा ने 2024 में अमेरिका के साथ मिलकर चीनी गाड़ियों पर 100% टैरिफ लगाया था। अब नए समझौते के तहत इस टैरिफ को घटाकर 6.1% किया जा रहा है। हालांकि यह हर साल 49 हजार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लागू होगा। 5 साल में इसे बढ़ाकर 70 हजार तक किया जा सकता है। इसके बदले में चीन, कनाडा के कुछ अहम कृषि उत्पादों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को घटाएगा। पहले यह टैरिफ 84% तक था, जिसे अब घटाकर 15% कर दिया गया है। साल के अंत तक इसे जीरो किया जा सकता है। कनाडा और अमेरिका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, जहां हर रोज लगभग 15 हजार करोड़ रुपए के सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान होता है। 2024 में, द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य लगभग 79 लाख करोड़ रुपए का था, जिसमें अमेरिका का कनाडा के साथ माल व्यापार घाटा 5.21 लाख करोड़ रुपए रहा। USMCA (यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट) दोनों देशों के बीच एक अहम समझौता था। यह 2020 में लागू हुआ था। यह समझौता मुक्त व्यापार को बढ़ावा देता है। 2026 में इसकी समीक्षा होनी है। USMCA के तहत सामान (81% आयात) पर छूट होती है। अमेरिका को मिलने वाला कच्चा तेल, गैस और बिजली का बड़ा हिस्सा कनाडा से आता है। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स, लकड़ी और कृषि उत्पाद भी अमेरिका में कनाडा से बड़े पैमाने पर जाते हैं। कनाडा अपने कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका को भेजता है। मशीनरी, टेक्नोलॉजी, दवाइयां और उपभोक्ता सामान के मामले में कनाडा अमेरिका पर काफी हद तक निर्भर है। ट्रम्प के गोल्डन डोम प्रोजेक्ट का कनाडाई PM ने विरोध किया था ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा कर वहां गोल्डन डोम बनाना चाहते हैं। कार्नी ने ट्रम्प के कब्जे वाली बात का विरोध किया था, इसपर अमेरिकी राष्ट्रपति नाराज हो गए थे। अमेरिका ने इजराइल के आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तर्ज पर अपना डिफेंस सिस्टम गोल्डन डोम बनाने का फैसला किया है। ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के एक हफ्ते बाद ही गोल्डन डोम प्रोजेक्ट का ऐलान किया था। यह प्रोजेक्ट करीब 175 अरब डॉलर (लगभग 14-15 लाख करोड़ रुपए) का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए 1200 से ज्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च करने की योजना बनाई गई है। इसकी मदद से अमेरिका दुश्मन मिसाइलों का अंतरिक्ष में ही पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की तैयारी कर रहा है। इनमें 400 से 1000 सैटेलाइट्स दुश्मन मिसाइलों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए तैनात किए जाएंगे। वहीं, लगभग 200 इंटरसेप्टर सैटेलाइट्स उन मिसाइलों को अंतरिक्ष में ही मार गिराने के लिए तैयार की जाएंगी। यह डिफेंस सिस्टम दुनिया के किसी भी हिस्से से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगा। ट्रम्प ने दावा किया है कि गोल्डन डोम अंतरिक्ष से हुए हमलों को भी रोकने के काबिल होगा। इसमें सर्विलांस सैटेलाइट और इंटरसेप्टर सैटेलाइट दोनों शामिल होंगे। ट्रम्प ने जनवरी में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था। उन्होंने कहा है कि यह सिस्टम 2029 तक काम करने लगेगा। प्रोजेक्ट की कमान अमेरिकी स्पेस फोर्स के वरिष्ठ जनरल माइकल ग्यूटलेन को सौंपी गई है। कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। कार्नी ने पिछले साल मई में ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इस दौरान कार्नी ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा था कि कनाडा बिकाऊ नहीं है। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो वहां के लोगों को कम टैक्स, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इस पर कार्नी ने ट्रम्प को जवाब देते हुए कहा कि जैसे रियल एस्टेट में कुछ जगहें कभी बिक्री के लिए नहीं होतीं, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस इमारत में वे बैठे हैं या बकिंघम पैलेस जैसी जगहें कभी नहीं बेची जातीं, उसी तरह कनाडा भी न कभी बिकेगा और न कभी बेचा जाएगा। कार्नी ने यह भी कहा था कि कनाडावासियों की सोच इस मुद्दे पर नहीं बदलेगी और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में टेक्सटाइल मालिकों की फैक्ट्रियां बंद करने की धमकी: कहा- भारतीय धागा उद्योग बर्बाद कर रहा, टैक्स छूट हटाने की मांग; 10 लाख नौकरियों पर खतरा बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री गंभीर संकट से गुजर रही है। टेक्सटाइल मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जनवरी के अंत तक यार्न (धागे) के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को खत्म नहीं करती, तो 1 फरवरी से देशभर की मिलों में काम बंद कर दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… https://www.bhaskar.com/international/news/canada-pm-trump-tariff-threat-no-china-trade-deal-137045405.html
वर्ल्ड अपडेट्स:बिना रस्सी या सुरक्षा के अमेरिकी रॉक क्लाइंबर ने 1,667 फीट ऊंची और 101 मंजिला इमारत चढ़ी, नेटफ्लिक्स पर लोगों ने लाइव देखा अमेरिकी रॉक क्लाइंबर एलेक्स हॉनोल्ड ने रविवार को दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में से एक ताइवान की ताइपे 101 (1,667 फीट ऊंची) को बिना रस्सी, हार्नेस या किसी सुरक्षा के चढ़कर इतिहास रच दिया। यह फ्री सोलो क्लाइंब था, जिसमें उन्हें बिना बाहरी मदद के अकेले चढ़ना था। एलेक्स ने इमारत के एक कोने से चढ़ाई शुरू की। वे संकरी L-आकार की उभरी हुई जगहों पर पैर रखकर ऊपर बढ़ते गए। नीचे सड़क पर खड़े लोग उत्साह से चीयर कर रहे थे। लगभग 90 मिनट (1 घंटा 31 मिनट) की मेहनत के बाद वे इमारत के सबसे ऊपर स्पायर पर पहुंचे। उन्होंने कहा, "क्या नजारा है, कितना शानदार दिन है। हवा बहुत तेज थी, इसलिए मैं संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा था। ताइपे को ऐसे देखना अद्भुत था।" ताइपे 101 की खास डिजाइन ने उन्हें सबसे मुश्किल चुनौती दी। बीच में 'बांस बॉक्स' जैसे ढांचे थे, जहां दीवारें बहुत तेज ढलान वाली और ओवरहैंगिंग थीं। इन आठ सेक्शन में हर एक में आठ मंजिलों जैसी कठिन चढ़ाई थी। पूरी चढ़ाई नेटफ्लिक्स पर लाइव प्रसारित हुई, जिसमें 10 सेकंड का डिले था। बारिश के कारण इसे एक दिन टाल दिया गया था। एलेक्स हॉनोल्ड पहले भी कई बड़े कारनामे कर चुके हैं। 2017 में उन्होंने योसेमाइट के एल कैपिटन (3,000 फीट) को बिना रस्सी के चढ़ा था, जिस पर डॉक्यूमेंट्री 'फ्री सोलो' बनी और ऑस्कर जीती। https://www.bhaskar.com/international/news/world-news-updates-trump-china-russia-saudi-arabia-news-137044717.html
ट्रम्प ने NATO पर दिए बयान पर सफाई दी:ब्रिटिश सैनिकों की तारीफ की, कहा- अफगानिस्तान में जो शहीद हुए, वे महान योद्धा अफगानिस्तान युद्ध में NATO की भूमिका पर विवादित बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। शनिवार को उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की तारीफ करते हुए अफगानिस्तान युद्ध में उनकी कुर्बानियों को याद किया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ब्रिटेन के महान और बेहद बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में 457 ब्रिटिश सैनिक मारे गए, कई गंभीर रूप से घायल हुए और वे दुनिया के सबसे महान योद्धाओं में शामिल थे। ट्रम्प का यह बयान उस विवाद के बाद आया है, जब उन्होंने इस हफ्ते एक इंटरव्यू में कहा था कि NATO देशों ने अफगानिस्तान में सीमित भूमिका निभाई और वे फ्रंटलाइन से दूर रहे। उनकी इस टिप्पणी से NATO के सहयोगी देशों में नाराजगी फैल गई थी। ब्रिटेन ने ट्रम्प को बयान को अपमानजनक बताया था ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रम्प के बयान को “अपमानजनक और बेहद आपत्तिजनक” बताया। अफगानिस्तान युद्ध में हिस्सा ले चुके प्रिंस हैरी ने भी कहा कि NATO सैनिकों की कुर्बानियों को सम्मान और सच्चाई के साथ याद किया जाना चाहिए। स्टार्मर ने शनिवार को ट्रम्प से फोन पर बात की। डाउनिंग स्ट्रीट के मुताबिक, बातचीत में अफगानिस्तान में साथ लड़ने वाले ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों की बहादुरी और बलिदान पर चर्चा हुई। ब्रिटिश पीएम ने कहा- आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने NATO देशों से मदद ली 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था। अल-कायदा के आतंकियों ने चार यात्री विमानों को हाईजैक किया। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां इमारतों से टकराए, एक विमान पेंटागन से और चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में गिरा। इन हमलों में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने इसे सिर्फ आतंकी हमला नहीं, बल्कि अपने देश पर सीधा युद्ध बताया। इसी के बाद अमेरिका ने NATO से औपचारिक मदद मांगी। NATO ने पहली बार अपने इतिहास में आर्टिकल 5 लागू किया। इस आर्टिकल के तहत यह माना जाता है कि संगठन के किसी एक सदस्य देश पर हमला, सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। आर्टिकल 5 लागू होते ही ब्रिटेन, इटली, डेनमार्क समेत NATO के कई सदस्य और साझेदार देश अमेरिका के समर्थन में अफगानिस्तान पहुंचे। अमेरिका का कहना था कि अल-कायदा को अफगानिस्तान में तालिबान का संरक्षण मिला हुआ है। इसके बाद करीब 20 साल तक NATO देशों की सेनाएं अमेरिकी फौज के साथ अफगानिस्तान में रहीं। इस दौरान हजारों विदेशी सैनिक तैनात किए गए और सैकड़ों सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। NATO ने अफगानिस्तान में दो अभियान चलाए थे अफगानिस्तान में NATO के तहत मुख्य रूप से दो बड़े अभियान चले, जिनमें ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, डेनमार्क सहित दर्जनों देशों के हजारों सैनिकों ने हिस्सा लिया। पहला और सबसे बड़ा अभियान अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (ISAF) था, जो 2001 से 2014 तक चला। इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आदेश पर शुरू किया गया और 2003 से नाटो ने इसका नेतृत्व संभाला। ISAF का मकसद अफगान सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करना, सुरक्षा प्रदान करना और तालिबान/अल-कायदा के खिलाफ लड़ाई में मदद करना था। इस मिशन में अधिकतम 1,30,000 से ज्यादा सैनिक तैनात थे, जिसमें 51 नाटो और पार्टनर देश शामिल थे। दूसरा अभियान रेजोल्यूट सपोर्ट मिशन था, जो 2015 से 2021 तक चला। यह गैर-लड़ाकू मिशन था, जिसमें अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों (ANDSF) को प्रशिक्षण, सलाह और सहायता दी जाती थी। इसमें भी नाटो के 36 देशों के लगभग 9,000-17,000 सैनिक शामिल रहे। इन अभियानों में ब्रिटेन के 457 सैनिक, कनाडा के 159, फ्रांस के 90, जर्मनी के 62, पोलैंड के 44, डेनमार्क के 44 सैनिक शहीद हुए। यूरोपीय देश बोले- हमने साथ मिलकर लड़ाई की, इसे नहीं भुलाया जा सकता डच विदेश मंत्री डेविड वैन वील ने ट्रम्प के बयान को झूठा बताया। पोलैंड के पूर्व विशेष बल कमांडर और रिटायर्ड जनरल रोमन पोल्को ने कहा कि ट्रम्प ने हद पार कर दी है। उन्होंने कहा, "हमने इस गठबंधन के लिए खून बहाया, अपनी जानें दीं। हमने साथ मिलकर लड़ाई की लेकिन सभी घर नहीं लौटे।" पोलैंड के रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिश ने कहा कि पोलैंड के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और इसे कमतर नहीं दिखाया जा सकता। ब्रिटेन के पूर्व MI6 प्रमुख रिचर्ड मूर ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने CIA के बहादुर अधिकारियों के साथ खतरनाक मिशनों में काम किया और अमेरिका को अपना सबसे करीबी सहयोगी माना। ट्रम्प के बयान पर ब्रिटेन के लिबरल डेमोक्रेट्स नेता एड डेवी ने एक्स पर लिखा कि ट्रम्प ने वियतनाम युद्ध में ड्राफ्ट से बचने के लिए पांच बार छूट ली थी, फिर वे दूसरों के बलिदान पर सवाल कैसे उठा सकते हैं। https://www.bhaskar.com/international/news/trump-praises-british-soldiers-afghanistan-sacrifice-137037222.html
ट्रम्प के गाजा पीस बोर्ड में भारतवंशी अजय बंगा शामिल:वर्ल्ड बैंक ग्रुप का प्रेसिडेंट पद संभाल रहे; गाजा के पुनर्निर्माण में अहम रोल निभाएंगे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। इस कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने 'बोर्ड ऑफ पीस' (शांति बोर्ड) का गठन किया गया है। राष्ट्रपति खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड के सदस्यों की सूची जारी की। इस बोर्ड में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें भारतवंशी अजय बंगा भी शामिल हैं। बंगा फिलहाल वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष हैं। बोर्ड के दूसरे सदस्यों में मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), स्टीव विटकॉफ (विशेष राजदूत) समेत कई लीडर शामिल हैं। इसे गाजा में लंबे समय तक शांति, पुनर्निर्माण और आर्थिक पुनरुत्थान के लिए 20 सूत्रीय रोडमैप का अहम हिस्सा बताया गया है। पीस बोर्ड के हर सदस्य की अपनी तय जिम्मेदारी होगी व्हाइट हाउस ने कहा कि एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हर सदस्य गाजा की स्थिरता और लंबे समय की सफलता से जुड़े एक तय पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेगा। इसमें शासन क्षमता बढ़ाना, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के और सदस्यों की घोषणा की जाएगी। NCAG डॉ. अली शाथ के नेतृत्व में काम करेगी। डॉ. शा'थ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अली शाथ गाजा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा) को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। बराक ओबामा सहित कई अमेरिकी नेताओं के साथ काम कर चुके अजय बंगा 1959 में भारत के पुणे में अजयपाल सिंह बंगा का जन्म हुआ। पिता हरभजन सिंह बंगा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे, इसलिए बचपन में पूरे भारत में घूमना पड़ा। बंगा 2007 में अमेरिकी नागरिक बने। फिलहाल वे विश्व बैंक समूह के 14वें अध्यक्ष हैं। बंगा को 3 मई, 2023 को वर्ल्ड बैंक का प्रेसिडेंट चुना गया था। उन्हें फरवरी 2023 में जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा इस पद के लिए नॉमिनेट किया गया था। बंगा इससे पहले भी कई अहम पद संभाल चुके हैं। वह मास्टरकार्ड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रह चुके हैं। वर्ल्ड बैंक के लिए नॉमिनेट होने से पहले वह एक्सोर के चेयरमैन थे। बंगा पूर्व अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस के साथ सेंट्रल अमेरिका के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के चेयरमैन भी थे। अजय बंगा ने विश्व बैंक समूह के 14वें अध्यक्ष का पद संभालने के बाद कई सुधार वाले काम शुरू किए हैं। गाजा में आतंकवाद खत्म करने की जिम्मेदारी अमेरिकी जनरल को सौंपी गाजा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आतंकवाद खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना के मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर बनाया गया है। व्हाइट हाउस ने कहा कि जैस्पर जेफर्स सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व करेंगे। डी-मिलिट्राइजेशन में मदद करेंगे, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण में इस्तेमाल हो रही जरूरी चीजों की सुरक्षा करेंगे। अमेरिका ने इजराइल और अरब देशों के साथ साझेदारी की बात कही व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि अमेरिका इस ट्रांजिशनल फ्रेमवर्क को पूरी तरह समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत इजराइल, प्रमुख अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इस योजना को पूरा किया जाएगा। डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी पक्षों से गाजा के प्रशासन के लिए बनाए गए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG), बोर्ड ऑफ पीस और ISF के साथ पूरा सहयोग करने की अपील की है, ताकि योजना को तेजी से लागू किया जा सके। अमेरिकी प्रशासन बोली- NCAG का मकसद गाजा में स्थायी शांति लाना अमेरिकी प्रशासन ने NCAG को ट्रम्प की योजना के दूसरे चरण को लागू करने की अहम कड़ी बताया गया है। यह योजना 20 प्वाइंट रोडमैप पर आधारित है, जिसका मकसद गाजा में स्थायी शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और समृद्धि लाना है। योजना के मुताबिक, अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो युद्ध तुरंत खत्म हो जाएगा। इसके तहत इजराइली सेना तय लाइन तक पीछे हटेगी, ताकि बंधकों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो सके। सभी सैन्य गतिविधियां, जिनमें हवाई और तोपखाने हमले शामिल हैं, रोक दी जाएंगी। गाजा के लिए आर्थिक विकास योजना इस पहल में ‘ट्रम्प इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल है। इसके तहत मिडिल ईस्ट में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों का पैनल बनाकर गाजा के पुनर्निर्माण और विकास की योजना तैयार की जाएगी। योजना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समूहों से निवेश और विकास से जुड़े प्रस्ताव लिए जाएंगे। इनका मकसद सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करते हुए निवेश आकर्षित करना और रोजगार के मौके पैदा करना है। इसके साथ ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के साथ तरजीही टैरिफ और एक्सेस रेट तय किए जाएंगे। योजना में साफ कहा गया है कि गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकेंगे और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की आजादी होगी। योजना के मुताबिक, लोगों को गाजा में ही रहने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। https://www.bhaskar.com/international/news/world-bank-president-gaza-reconstruction-ajay-banga-136975765.html
ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला:धार्मिक यात्रा के बहाने इराक से बुलाया, सेना ने गोली चलाने से इनकार कर दिया था ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए 5,000 इराकी शिया लड़ाकों का सहारा लिया। CNN के मुताबिक यही वजह है कि प्रदर्शनकारियों की मौतों की संख्या अचानक बढ़ी और जिसके बाद प्रदर्शन शांत होने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने इनका इस्तेमाल तब किया, जब ईरानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने से मना कर दिया था। इसके बाद खामेनेई ने ईराकी शिया लड़ाकों की मदद ली। इन्हें धार्मिक यात्रा की आड़ में इराक से ईरान बुलाया गया। इन लड़ाकों में से कुछ का संबंध हिजबुल्लाह से भी था। इन्होंने खामेनेई के आदेश पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं जिसके बाद मौतों का आंकड़ा करीब 3,500 पहुंच गया। बॉर्डर के रास्ते ईरान आए कट्टरपंथी संगठनों के लड़ाके CNN के मुताबिक, पहले सिर्फ 800-850 लड़ाकों के ईरान आने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन 16 जनवरी को आई रिपोर्ट के मुताबिक ये आंकड़ा 5 हजार से ज्यादा बताया गया। इन्हें दक्षिणी बॉर्डर के पास मौजूद इराकी राज्य मेसान और वासित से ईरान लाया गया। एक यूरोपीय मिलिट्री सोर्स ने भी इसकी पुष्टि की है कि करीब 800 शिया लड़ाके दियाला, मायसान और बसरा प्रांतों से ईरान पहुंचे। CNN ने इस मामले पर इराक सरकार और लंदन स्थित ईरानी दूतावास से रिएक्शन मांगा, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। एक एक्सपर्ट ने कहा कि प्रदर्शनों का दबाने के लिए विदेशी मिलिटेंट ग्रुप्स का सहारा लेना खामेनेई की एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे प्रदर्शनकारियों और विदेशी लड़ाकों में बीच किसी तरह के सहानुभूति न पनप पाए, ताकि सख्ती से कदम उठाए जा सकें। ईरान के लिए काम करते हैं इराकी लड़ाके ये लड़ाके उन सशस्त्र संगठनों से जुड़े हैं जिन्हें सीधे तौर पर तेहरान का वफादार माना जाता है। इनमें कताइब हिजबुल्लाह, हरकत हिजबुल्लाह, अल-नुजाबा, कताइब सैयद अल-शुहादा और बद्र संगठन शामिल हैं। ये सभी सशस्त्र समूह इराक के एक छत्र संगठन पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज के तहत काम करते हैं, जिसे इराक में सरकारी समर्थन प्राप्त पारामिलिट्री फोर्स माना जाता है। इन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ट्रेनिंग, हथियार और पैसा देकर खड़ा किया है। इसलिए इनकी असली निष्ठा इराकी सरकार से ज्यादा ईरान की सत्ता के साथ है। धार्मिक यात्रा के बहाने 60 बसों में भरकर आए लड़ाके इराकी गृह मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी अली डी. ने न्यूज एजेंसी मीडिया लेन को ईरान-इराक बॉर्डर पर बढ़ रही आवाजाही के बारे में बताया था। अली के मुताबिक, 11 जनवरी को 60 से ज्यादा 50 सीटर बसों में भरकर शिया तीर्थयात्री ईरान की ओर रवाना हुए। अली ने बताया कि बसों में सिर्फ आदमी थे, न परिवार थे और नही कोई वृद्ध। सभी ने एक जैसी काली टीशर्ट पहनी हुई थी। CNN के मुताबिक, जिस दिन ये बसें ईरान पहुंची, तब तक ईरान के सभी 31 राज्यों तक सरकार विरोधी प्रदर्शन फैल चुके थे। ईरानी विपक्षी नेता मेहदी रजा के मुताबिक, इराकी मिलिटेंट को सरकारी इमारतों और सैन्य मुख्यालयों के सामने तैनात किया गया। मशीनगन लेकर ईरान की सड़कों पर घूम रहे लड़ाके ईरान की राजधानी तेहरान के एक व्यक्ति के मुताबिक, इराकी लड़ाकों ने प्रदर्शनकारियों का नरसंहार करना शुरू कर दिया था, जिसके डर से विरोध प्रदर्शन बंद हो गए थे। न्यूयॉर्क पोस्ट से हुई बातचीत में व्यक्ति ने कहा कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डरने लगे थे, क्योंकि मशीनगन लिए इराकी लड़ाकों ने ईरान की सड़कों पर कब्जा कर लिया था। यही वजह है कि अब ईरान में बड़े स्तर पर कोई प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में भी दावा किया गया कि पिछले कुछ दिनों से तेहरान में शांति है। शहर के ऊपर ड्रोन उड़ रहे हैं। 16 और 17 जनवरी को किसी तरह का विरोध प्रदर्शन दर्ज नहीं किया गया। हालांकि कुछ जगहों पर अशांति की खबरें आ रही हैं। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में मौजूद ईरानी मानवाधिकार संगठन से जुड़े महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने शुक्रवार को बताया कि ईरान में अब तक लगभग साढ़े 3 हजार मौतें हुई हैं। महमूद ने कहा कि विदेशी लड़ाकों के नरसंहार मचाने के बाद से फिलहाल प्रदर्शन शांत हैं। ----------------------------------- ईरान में जारी प्रदर्शन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी:ट्रम्प बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं; ईरान का जवाब- हमला किया तो छोड़ेंगे नहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में अमेरिका ने गुरुवार को ईरान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हो रही क्रूर दमनकारी कार्रवाई को रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने ईरान के लोगों की बहादुरी की सराहना की और कहा कि ईरान के लोगों ने इतिहास में कभी भी इतने जोरदार तरीके से आजादी की मांग नहीं की। वाल्ट्ज ने कहा, ‘ट्रम्प एक्शन लेने वाले इंसान हैं, लंबी-लंबी बातें करने वाले नहीं।’ उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के नेतृत्व को पता होना चाहिए कि अमेरिका इस नरसंहार को रोकने के लिए कोई भी कदम उठा सकता है। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की इस बैठक में ईरान के उप-राजदूत ने जवाब दिया कि उनका देश टकराव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया गया तो ईरान जवाब देगा। पढ़ें पूरी खबर... https://www.bhaskar.com/international/news/iran-protests-iraq-fighters-khamenei-army-refusal-136969501.html
ट्रम्प बोले- रूस-चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे:इन्हें पड़ोसी के तौर पर नहीं चाहता; हमें दूसरे सख्त तरीके अपनाने होंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को ग्रीनलैंड को लेकर अपने तेवर और कड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका अगर ग्रीनलैंड को आसान तरीके से हासिल नहीं कर पाया, तो दूसरे सख्त तरीके अपनाने होंगे। ट्रम्प ने कहा, ‘हम ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कुछ न कुछ करेंगे, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो। अगर हमने ऐसा नहीं किया तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे। हम रूस या चीन को पड़ोसी के रूप में नहीं रखना चाहेंगे।’ ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड से आसान तरीके से सौदा चाहता हूं ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं चाहता हूं कि सौदा आसान तरीके से हो जाए।’ हालांकि, उन्होंने डेनमार्क के प्रति अपनी नरमी भी जताई और कहा, ‘वैसे मैं डेनमार्क का बहुत बड़ा फैन हूं। वे मेरे साथ बहुत अच्छे रहे हैं।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ग्रीनलैंड के लोगों को सीधे पैसे देकर उन्हें अमेरिका के साथ जुड़ने के लिए राजी करने की योजना बना रहा है। इसपर ट्रम्प ने कहा, ‘अभी मैं ग्रीनलैंड के लिए पैसे की बात नहीं कर रहा हूं। हो सकता है बाद में करूं।’ ट्रम्प ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। ग्रीनलैंड के पास रूसी और चीनी गतिविधियां बढ़ी ट्रम्प ने ग्रीनलैंड के पास रूसी और चीनी नौसेना की बढ़ती गतिविधियों का हवाला दिया, जिसमें डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियां शामिल हैं। ट्रम्प ने जोर देकर कहा, "हम रूस या चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने नहीं देंगे।" उन्होंने कहा कि वे चीन और रूस दोनों को पसंद करते हैं। उनके नेताओं व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन वह उन्हें ग्रीनलैंड नहीं दे सकते। ट्रम्प बोले- मालिक बनकर बेहतर तरीके से रक्षा करेंगे जब ट्रम्प से पूछा गया कि अमेरिका का पहले से ही वहां सैन्य अड्डा है, तो पूरे कब्जे की क्या जरूरत है। इसपर ट्रम्प ने जवाब दिया कि लीज काफी नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘जब हम मालिक होते हैं, तो हम इसकी रक्षा करते हैं। लीज की रक्षा उतनी नहीं की जाती। हमें पूरा मालिकाना हक चाहिए।’ ट्रम्प ने पुरानी कूटनीति की आलोचना भी की । उन्होंने कहा कि देश100 साल के सौदे नहीं कर सकते, बल्कि मालिकाना हक से ही रक्षा होती है। https://www.bhaskar.com/international/news/trump-does-not-want-russia-and-china-as-neighbors-136907758.html
बांग्लादेश को JF-17 फाइटर जेट बेचने की तैयारी में पाकिस्तान:चीन के साथ मिलकर बनाया; इस्लामाबाद में दोनों देशों के एयरफोर्स चीफ ने बातचीत की पाकिस्तान बांग्लादेश को JF-17 थंडर फाइटर जेट बेचने की तैयारी में है। इसको लेकर दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों के बीच इस्लामाबाद में बातचीत हुई है। पाकिस्तानी सेना ने इस वार्ता की पुष्टि की है। बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार के मुताबिक पाकिस्तान एयरफोर्स प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिधु और बांग्लादेश वायुसेना प्रमुख हसन महमूद खान के बीच बैठक हुई। बातचीत में JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री और रक्षा सहयोग पर चर्चा की गई। JF-17 थंडर एक मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर विकसित किया है। यह विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम माना जाता है और पाकिस्तान वायुसेना में पहले से सेवा में है। बांग्लादेश को ट्रेनर विमान भी देगा पाकिस्तान रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने बांग्लादेश को ‘सुपर मुश्शक’ ट्रेनर विमान की फास्ट-ट्रैक डिलीवरी का भरोसा भी दिया है। इसके साथ पायलट ट्रेनिंग और लॉन्ग-टर्म सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराने की बात कही गई है। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा चल रही है। बांग्लादेश की ओर से इस संभावित सौदे पर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हाल के महीनों में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़े हैं। पाकिस्तान के साथ संबंध बढ़ा रहा बांग्लादेश बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ है। जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में लगातार सुधार आया है। मोहम्मद यूनुस अगस्त 2024 के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से दो बार मुलाकात कर चुके हैं। नवंबर 2024 में, 1971 के बाद पहली बार एक पाकिस्तानी कार्गो जहाज चटगांव बंदरगाह पहुंचा था। इसके अलावा अप्रैल 2025 में ढाका में 15 साल बाद दोनों देशों के विदेश सचिवों ने मुलाकात की थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी 27-28 अप्रैल को ढाका का दौरा किया था, जो 2012 के बाद पहली उच्च-स्तरीय यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए समझौतों पर चर्चा की थी। बांग्लादेश–पाकिस्तान के बीच बेहतर हो रहे रिश्ते जनवरी 2025: बांग्लादेशी लेफ्टिनेंट जनरल एस.एम. कमर-उल-हसन का पाकिस्तान दौरा। फरवरी 2025: पहली बार सीधे व्यापार शुरू। पाकिस्तान से 50,000 टन चावल की खेप बांग्लादेश भेजी गई। अगस्त 2025: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ढाका पहुंचे। 13 साल में इस स्तर का पहला दौरा। सितंबर 2025: मोहम्मद यूनुस और इशाक डार के बीच न्यूयॉर्क में बातचीत, डिप्लोमैटिक चैनल फिर सक्रिय। अक्टूबर 2025: पाकिस्तान के दूसरे नंबर के आर्मी जनरल साहिर शमशाद मिर्जा बांग्लादेश गए, डिफेंस और सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर बातचीत। अक्टूबर 2025: दोनों देशों ने सैन्य सहयोग बढ़ाने, ट्रेनिंग एक्सचेंज और मिलिट्री-टू-मिलिट्री इंटरेक्शन बढ़ाने पर सहमति जताई। https://www.bhaskar.com/international/news/pakistan-preparing-to-sell-jf-17-fighter-jets-to-bangladesh-136890488.html
वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प की धमकी के बाद ईरान के आर्मी चीफ ने सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी; बोले- दुश्मनों को जवाब देंगे ईरान के सेना कमांडर मेजर जनरल अमीर हातमी ने विदेशी धमकियों के जवाब में सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि अगर ईरान की सेनाएं शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करेंगी या उन्हें मारेंगी, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। हातमी ने सैन्य अकादमी के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ इस तरह की बढ़ती बयानबाजी को बिना जवाब नहीं छोड़ा जाएगा। फॉक्स न्यूज के अनुसार उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं अब पहले की तुलना में ज्यादा तैयार हैं। अगर कोई दुश्मन गलती करेगा, तो उसका ज्यादा निर्णायक जवाब दिया जाएगा। दरअसल, ईरान में आर्थिक संकट, महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ एक सप्ताह से ज्यादा समय से प्रदर्शन चल रहे हैं और देश के कई हिस्सों में फैल चुके हैं। सरकार ने कुछ आर्थिक राहत जैसे नई सब्सिडी की घोषणा की है, लेकिन प्रदर्शन थम नहीं रहे हैं। ईरान इन प्रदर्शनों को आंतरिक मामला मानता है और विदेशी हस्तक्षेप को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहा है। इसके अलावा, ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरावानी ने यूएन महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर ट्रम्प की टिप्पणियों को गैरकानूनी बताते हुए इसकी निंदा करने की मांग की है। वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने चेतावनी दी कि अमेरिकी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में अराजकता पैदा करेगा और अमेरिकी हितों को नष्ट कर देगा। https://www.bhaskar.com/international/news/irans-army-chief-warns-of-military-action-after-trumps-threat-says-will-respond-to-enemies-136890304.html
रूसी आर्मी में गोली से मरे पंजाबी युवक की कहानी:डोंकर ने पीटकर सेना में भेजा, यूक्रेन से लड़ने को छोड़ा; भाई ने 4 बार जाकर लाश ढूंढी पंजाब के जालंधर से रूस गया युवक मनदीप 3 साल बाद ताबूत में लौटा। रूस-यूक्रेन युद्ध में उसकी 2024 में गोली लगने के बाद मौत हो गई। छोटे भाई जगदीप ने मनदीप को जिंदा ढूंढने का 4 बार प्रयास किया मगर असफल रहा। कभी रशियन लैंग्वेज, कभी पैसा, कभी सरकार की पॉलिसी भाई को ढूंढने में बाधा बनती रही। एक साल की मेहनत के बाद भाई मिला, लेकिन जिंदा नहीं मुर्दा। डेडबॉडी भी ऐसी जिसे पहचानना भी मुश्किल था। जगदीप ने अपने भाई को रूस से ढूंढने का पूरा किस्सा साझा किया। पूरी कहनी बताते ही उसका गला रुंध जाता है और आंखों में आंसू आ जाते हैं। उसका कहना है कि मां से वादा किया था कि भाई को सही सलामत लेकर आऊंगा, मगर इस हाल में लेकर आया हूं कि उसे देख भी नहीं सकते। मनदीप के रूस जाने, वहां सेना के ट्रैप में फंसने से लेकर डेडबॉडी मिलने तक की पूरी कहानी पढ़िए... पहले मनदीप के रूस पहुंचने व ट्रैप में फंसने की कहानी 17 सितंबर 2023 मनदीप ने अमृतसर से आर्मेनिया के लिए उड़ान भरी ये वही तारीख है जिस दिन मनदीप ने गोराया स्थित घर की दहलीज से बाहर कदम रखा। आंखों में परिवार को गरीबी से निकालने के सपने लेकर अमृतसर के एयरपोर्ट से आर्मेनिया के लिए उड़ान भरी। उसके साथ उसकी जान-पहचान के 2 लोग और एक रिश्तेदार भी था। आर्मेनिया पहुंचने के बाद मनदीप ने यहां मजदूरी की। घर वालों से बराबर बात करता रहा। यहां से तीनों ने रूस में आर्मी में काम की एड देखी। एक एजेंट ने इनको अच्छा पैसा दिलाने का झांसा दिया। 9 दिसंबर 2023 मनदीप आर्मेनिया से रूस पहुंचा ये वो तारीख है, जहां से मनदीप कुमार के बुरे दिन शुरू हो गए। मनदीप दिव्यांग था। बावजूद इसके एजेंट ने फौज में काम दिलाने का झांसा दिया। उन्हें कहा गया कि उनको वॉर फ्रंट पर नहीं भेजा जाएगा। उनको सेना के लिए खाना तैयार करना होगा और हथियार ट्रकों में लोड करने होंगे। सभी को काम के बदले मोटा पैसा दिया जाएगा। मनदीप एजेंट की बातों में आ गया। काम करने आया था तो उसे काम में कोई बुराई नहीं लगी। रिश्तेदार और बाकी 3 साथियों को काम ठीक नहीं लगा और वो इंडिया लौट आए। खाना बनाने-हथियार लोड करने की बात कह ट्रेनिंग दी मनदीप के भाई ने बताया कि उसके साथ काम करने वाले दिल्ली के युवक ने बताया कि मनदीप उनसे सीनियर कमांडर के अंडर था। यहां पर सभी लोगों को यही कहकर भर्ती किया गया था कि आपको फ्रंट लाइन से पीछे रहना है और सेना के लिए खाना और हथियार मुहैया करवाने हैं। जब उनको जंग की ट्रेनिंग दी जाने लगी तो सभी ने विरोध जताया। इस पर एजेंट ने कहा कि ये ट्रेनिंग तुम्हारे सेफ्टी पर्पज के लिए है। वह ट्रैप में फंस चुके, इसका खुलासा तब हुआ जब उनको गाड़ी में बैठाकर यूक्रेन के बॉर्डर पर लड़ने के लिए छोड़ दिया गया। धोखे का पता चला तो डोंकर ने पीटा रूस पहुंचने वाला मनदीप कुमार 18 जनवरी 2024 को रूसी आर्मी में काम पर लगा। भाई जगदीप के अनुसार- भाई को धोखे का पता चला तो उसने काम छोड़ना चाहा। मगर अंकित डोंकर (ट्रैवल एजेंट) ने मारपीट की। मनदीप ने सारी कहानी की वीडियो बनाकर भेजी और बताया कि अंकित डोंकर ने 12 और लोगों को उसके साथ भर्ती करवाया है। अंकित डोंकर को जनवरी 2025 में अमृतसर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अंकित डोंकर सहित उसके साथियों के खिलाफ मनदीप के भाई जगदीप ने थाना गोराया में 2023 को FIR दर्ज करवाई थी। राजस्थान में भी केस होने के चलते राजस्थान पुलिस अंकित डोंकर को लेकर चली गई थी। अब जानें, भाई ने कैसे ढूंढ निकाली डेडबॉडी मां को पहली बार बताया- मनदीप नहीं रहा जगदीप ने बताया कि मुझे और पिता को पता चल चुका था कि भाई मनदीप की मौत हो गई है, मगर, इसके बारे में मां को नहीं बताया था। उनको यही बताया था कि वह उसको ढूंढ रहे हैं और सही सलामत वापस लाएंगे। रात तो जब एम्बुलेंस मनदीप की डेडबॉडी तो ताबूत में लेकर पहुंचे तो मां को बताया कि मनदीप की मौत हो गई है। जगदीप बोला-रूस सरकार के खिलाफ कोर्ट जाऊंगा जगदीप कुमार ने कहा कि रूस की आर्मी में उसके भाई को भर्ती कैसे किया गया,इस बाबत रूस की अदालत में भी मुकदमा दायर करेगा। गोराया में दिल्ली से पहुंचे देव ने कहा कि वह 5 महीने रूस की आर्मी की तरफ से लड़ा है। उसे टांग और बाजू पर गोली लगी थी। मेरे जैसे 3 हजार भारतीय रूस की सेना में फंसे हैं। कई मारे गए हैं जिनके परिवारों को पता भी नहीं है। देव ने कहा कि कोई भी युवा ई वीजा लेकर न जाए। ये जाते ही अवैध हो जाता है और फिर आपके पास कोई चारा नहीं रहता। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ और मनदीप के साथ भी। कांग्रेस विधायक बोले-केंद्र सरकार ने की लापरवाही मनदीप की डेडबॉडी आने पर पहुंचे फिल्लौर से कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह चौधरी ने कहा कि मनदीप के साथ जो कुछ हुआ है उसमें केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन की लापरवाही है। मनदीप के मौत मामले को पंजाब सरकार वह पुलिस प्रशासन के समक्ष उठाएंगे। अपने बेटे की सूचना की उम्मीद में लुधियाना से पहुंचा पिता मनदीप की डेडबॉडी आने की सूचना पर लुधियाना के गांव डाबा से चरणजीत सिंह भी गोराया पहुंचे। उसने बताया कि उसका बेटा समरप्रीत सिंह जुलाई 2025 में रूस के शहर मास्को गया था। पढ़ाई करते हुए उसे वहां पर रूस की आर्मी में डॉक्टर के असिस्टेंट के तौर पर भर्ती करवा दिया गया। सितंबर में वीडियो कॉल के जरिए 11 से 12 सेकेंड बात हुई थी और उसके बाद आज तक उनके बेटे से बातचीत नहीं हो पाई है। https://www.bhaskar.com/local/punjab/jalandhar/news/jalandhar-mandeep-russia-ukraine-war-full-story-136859074.html
सऊदी से ज्यादा तेल फिर भी दाने-दाने को मोहताज वेनेजुएला:कभी दुनिया का चौथा अमीर देश था, शॉपिंग के लिए मियामी जाते थे लोग यह कहानी एक ऐसे देश की है जिसके पास सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल है, लेकिन पिछले एक दशक में उसने अपनी 80% जीडीपी गंवा दी। कभी दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल इस देश ने अपनी दौलत का ऐसा मिसमैनेजमेंट किया कि आज वहां के लोग देश छोड़ रहे हैं। बात हो रही है 'वेनेजुएला' की, जिस पर शनिवार 3 जनवरी को अमेरिका ने हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका में हो रही इस हलचल का असर भारत में आम आदमी पर भी पड़ सकता है। इस रिपोर्ट में वेनेजुएला की बर्बादी की इनसाइड स्टोरी और भारत पर इसका असर जानेंगे… 1950 का दशक: जब चमक रही थी वेनेजुएला की किस्मत 1950 के दशक में जब आधी दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के नुकसान से उबर रही थी, तब वेनेजुएला की किस्मत जमीन के नीचे से निकलने वाले काले सोने यानी तेल ने बदल दी थी। 1952 के आसपास वेनेजुएला दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश बन चुका था। राजधानी कराकस की सड़कों पर उस समय ऐसी लग्जरी कारें दौड़ती थीं और वहां गगनचुंबी इमारतें खड़ी थीं। 1960 के दशक तक वेनेजुएला सिर्फ तेल बेचने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह ग्लोबल मार्केट का 'किंगमेकर' बन गया। वेनेजुएला की ही पहल पर सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों ने हाथ मिलाया और दुनिया के सबसे ताकतवर संगठन 'ओपेक' (OPEC) की नींव रखी गई। 1970 के दशक में जब पूरी दुनिया में तेल संकट आया और कीमतें आसमान छूने लगीं, तो वेनेजुएला के घरों में मानो पेट्रो-डॉलर की बारिश होने लगी। उस दौर के किस्से आज भी मशहूर हैं… बर्बादी की शुरुआत: 3 मुख्य वजहों से डूबी इकोनॉमी यह इतिहास में बिना किसी युद्ध के किसी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा कोलैप्स है। पिछले एक दशक में इस देश ने वह सब खो दिया जो उसने 70 सालों में कमाया था। डच डिजीज एक ऐसी आर्थिक स्थिति है जिसमें किसी देश को प्राकृतिक संसाधनों की अचानक खोज से बहुत ज्यादा विदेशी मुद्रा मिलने लगती है। इससे देश की करेंसी इतनी मजबूत हो जाती है कि वहां के अन्य उत्पाद जैसे खेती और फैक्ट्रियों का सामान विदेशी बाजारों में महंगे हैं और कोई उन्हें खरीदना नहीं चाहता। नतीजा यह होता है कि वह देश पूरी तरह से सिर्फ उसी एक चीज (जैसे तेल) पर निर्भर हो जाता है। आज की स्थिति: 80% GDP खत्म, महंगाई आसमान पर 2018 के आते-आते यहां महंगाई की रफ्तार 1,30,000% के पार चली गई। वहां के लोग एक दर्जन अंडे खरीदने के लिए भी नोटों से भरा झोला ले जाने को मजबूर थे। नोट गिने नहीं जाते थे, बल्कि तराजू के एक पलड़े पर सामान और दूसरे पर नोटों की गड्डियां रखी जाती थीं। 1990 के दशक के आखिर में जो देश रोजाना 35 लाख बैरल तेल निकालकर दुनिया पर राज करता था, वह आज 2026 की शुरुआत तक बमुश्किल 8 से 11 लाख बैरल पर सिमट गया है। सरकारी तेल कंपनी मेंटेनेंस के अभाव में सब कबाड़ हो गई। पेट्रोल विदेशों से मंगाया जा रहा है। वेनेजुएला अपनी 80% जीडीपी गंवा चुका है। इसका मतलब यह है कि अगर 2012 में देश की अर्थव्यवस्था 100 रुपए की थी, तो आज वह सिर्फ 20 रुपए की बची है। इस बर्बादी का सबसे डरावना चेहरा बनकर उभरी वहां की महंगाई, जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'हाइपरइन्फ्लेशन' कहते हैं। आज का संकट: क्या अमेरिका बदल पाएगा किस्मत? ट्रम्प सरकार का दावा है कि इस सैन्य ऑपरेशन के बाद अब अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी और वहां के टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेंगी। हलांकि, वहां बदलाव आएगा या नहीं यह वहां बनने वाली नई सरकार पर निर्भर करेगा। यदि वहां अमेरिका समर्थित एक स्थिर व्यवस्था आती है, तो सालों से लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे और वेनेजुएला का तेल दोबारा बड़ी मात्रा में ग्लोबल मार्केट में आने लगेगा, जिससे न सिर्फ वहां की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी बल्कि भारत जैसे देशों को भी सस्ता कच्चा तेल मिल सकेगा। भारत पर असर: सस्ता क्रूड ऑयल मिल सकता है वेनेजुएला भारत से करीब 15 हजार किलोमीटर दूर है, लेकिन वहां की सत्ता में हुआ बदलाव भारत के लिए 'गेमचेंजर' साबित हो सकता है। समझते हैं इसका आम भारतीय पर क्या असर होगा… 1. पेट्रोल-डीजल: रूस जैसा 'डिस्काउंट' मिलने की उम्मीद भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत वहां से तेल नहीं खरीद पा रहा था। 2. रिलायंस और ONGC को भी फायदे की उम्मीद भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ऐसी रिफाइनरी है जो वेनेजुएला के 'भारी और गाढ़े' तेल को साफ करने के लिए दुनिया में बेस्ट मानी जाती है। प्रतिबंधों की वजह से रिलायंस को वेनेजुएला से तेल लेना बंद करना पड़ा था। अब रिलायंस और सरकारी कंपनी ONGC (जिसने वेनेजुएला के तेल कुओं में करोड़ों निवेश किए हैं) का अटका हुआ पैसा और बिजनेस वापस शुरू होने की उम्मीद है। https://www.bhaskar.com/business/news/venezuela-economic-crisis-explained-nicolas-maduro-vs-us-india-crude-oil-136855351.html
मादुरो की गिरफ्तारी पर वर्ल्ड मीडिया:BBC ने कहा- वेनेजुएला अब ट्रम्प की विरासत; अमेरिकी मीडिया ने लिखा- मादुरो सरकार अड़ियल रवैया अपना रही अमेरिका ने 2 जनवरी की रात वेनेजुएला के 4 शहरों पर एकसाथ हमला किया। इस दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो एक मिलिट्री बेस में सो रहे थे। तभी अमेरिका की सीक्रेट डेल्टा फोर्स ने सर्च ऑपरेशन कर उन्हें खोज निकाला। सैनिकों ने मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया को बेडरूम से बाहर निकाला और अपने कब्जे में ले लिया। दोनों को को 4 जनवरी की आधी रात अमेरिका लाया गया। वहीं, ट्रम्प ने वेनेजुएला की कमान उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के हाथों में सौंपा। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक की मीडिया इस गिरफ्तारी को प्रमुखता से कवर कर रही है। पढ़िए प्रमुख मीडिया आउटलेट ने मादुरो को लेकर क्या लिखा... ब्रिटेन- BBC: वेनेजुएला अब ट्रम्प की विरासत, दुनिया में अमेरिका की इमेज बदल सकता है वेनेजुएला में डर का माहौल बनाने के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प अब राष्ट्र निर्माण के कारोबार में उतरते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को सफलतापूर्वक पकड़ लिया है। ट्रम्प ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ वेनेजुएला का कंट्रोल अपने हाथ में लेगी। देश चलाने से ट्रम्प का क्या मतलब है, फिलहाल यह तो साफ नहीं है, लेकिन यह एक अचानक आए बदलाव की ओर इशारा करती है। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों को तेल उद्योग ठीक करने और देश को फिर से मजबूत बनाने का वादा किया। यह कार्रवाई ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति में बड़ा बदलाव है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर यह कामयाब हुआ तो ट्रम्प की विरासत बहुत मजबूत हो जाएगी। लेकिन अगर गड़बड़ हुई (जैसे लंबा युद्ध, पैसा बर्बाद या अराजकता) तो यह उनकी बड़ी नाकामी बनेगी। यह अमेरिका की दुनिया में भूमिका भी बदल सकता है। कई देश इसे "इम्पीरियलिज्म" (साम्राज्यवाद) कह रहे हैं। यानी अमेरिका दूसरों के देशों पर कब्जा करना चाहता है, खासकर तेल के लिए (वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है)। लैटिन अमेरिकी देश, चीन-रूस जैसे विरोधी इसे गलत बता रहे हैं। कुछ ट्रम्प समर्थक भी नाराज हैं क्योंकि वे विदेशी झगड़ों से दूर रहना चाहते थे। अमेरिका- न्यूयॉर्क टाइम्स: ट्रम्प ने वेनेजुएला पर शासन की कसम खाई, मादुरो सरकार अड़ियल रवैया अपना रही अमेरिका के वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और राष्ट्रपति ट्रम्प के वेनेजुएला को अपने कंट्रोल में लेने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रपति की शक्ति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रम्प प्रशासन ने अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है कि वे किस तरह से वेनेजुएला को चलाएगा। जब ट्रम्प से पूछा गया कि क्या वेनेजुएला में शासन चलाने में मदद के लिए अमेरिकी सेना तैनात की जाएगी, तो उन्होंने जवाब दिया, "नहीं, अगर उपराष्ट्रपति वही करते हैं जो हम चाहते हैं, तो हमें ऐसा करने की जरूरत नहीं होगी।" इससे यह सवाल उठता है कि अगर रोड्रिग्ज पद छोड़ने से इनकार करती हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति वेनेजुएला का शासन कैसे चलाएंगे। कार्डोजो स्कूल ऑफ लॉ की प्रोफेसर और विदेश विभाग की पूर्व वरिष्ठ वकील रेबेका इंगबर ने कहा कि उन्हें अमेरिका के लिए वेनेजुएला को नियंत्रित करने का कोई कानूनी तरीका नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह एक अवैध कब्जा है और घरेलू कानून के तहत राष्ट्रपति को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। पाकिस्तान- द डॉन: मादुरो को न्यूयॉर्क की जेल में कैद किया, वेनेजुएला पर अब अमेरिका का शासन अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला पर हमले के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़े जाने की घोषणा की। अमेरिका ने हवाई हमलों में काराकास और उसके आसपास के इलाकों पर बमबारी की। व्हाइट हाउस ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें मादुरो को हथकड़ी और चप्पल पहने हुए, न्यूयॉर्क में अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन के एजेंट लेकर जा रहे हैं। ट्रम्प ने कहा, "हमारी बहुत बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला जाएंगी, अरबों डॉलर खर्च करेंगी और बुरी तरह से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत करेंगी।" चीन- साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट: अमेरिका ने मादुरो की सत्ता हथियाई, चीन को तेल देना जारी रखेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद, अमेरिका वेनेजुएला पर सीधा नियंत्रण बनाए रखेगा ताकि कोई और इस ​​पर कब्जा न कर सके।उन्होंने चीन को तेल की आपूर्ति जारी रखने का भी वादा किया है। यह हमला 1989 में पनामा पर हुए अटैक के बाद से लैटिन अमेरिका में अमेरिका की सबसे सैन्य कार्रवाई थी और इसने तत्काल अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया, जिनमें सबसे प्रमुख चीन की प्रतिक्रिया थी, जो वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल ग्राहक है। फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ट्रम्प ने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी नेता शासन करने की स्थिति में हैं। उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो की तारीफ की। उन्होंने मारिया को एक बहुत अच्छी महिला बताया। हालांकि उनके पास सत्ता संभालने के लिए समर्थन की कमी थी। मचाडो ने शनिवार को इससे पहले एक बिल्कुल अलग रुख अपनाते हुए मादुरो की गिरफ्तारी को आजादी का पल बताया और कहा कि विपक्ष सत्ता संभालने के लिए तैयार है। कतर- अल जजीरा: रिपब्लिकन पार्टी बोला- ट्रम्प को गर्व होना चाहिए, वे वेनेजुएला को आजाद करा रहे डोनाल्ड ट्रम्प ने जब राष्ट्रपति बनने की घोषणा की थी तब उन्होंने खुद को अमेरिका की पुरानी आक्रामक विदेश नीति से अलग बताया था। वे अपने विरोधियों को 'युद्ध पसंद' और 'जंगी बाज' कहते रहे हैं। अब उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़वाने का आदेश दिया है और कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला को खुद चलाएगा। इस फैसले की तुलना उन पुराने युद्धों से की जा रही है, जिनमें अमेरिका दूसरे देशों की सरकारें बदलता था। ट्रम्प हमेशा ऐसे युद्धों के खिलाफ बोलते थे। ट्रम्प के अपने समर्थक भी इस फैसले से नाराज हैं। वे इसे युद्ध की ओर बढ़ता कदम बता रहे हैं। फिर भी रिपब्लिकन पार्टी के ज्यादातर नेता ट्रम्प का साथ दे रहे हैं। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रम्प और उनकी टीम को गर्व होना चाहिए क्योंकि वे वेनेजुएला को आजाद कराने की शुरुआत कर रहे हैं। ग्राहम ने वेनेजुएला को 'ड्रग्स का खलीफा' कहा और बोले कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए अपने पड़ोस में इससे निपटना जरूरी है। ग्राहम ने ट्रम्प को अमेरिकी इतिहास का सबसे बेहतरीन राष्ट्रपति बताया। अमेरिकी मीडिया- CBS न्यूज: ट्रम्प बोले- फिलहाल हम ही देश चलाएंगे, अपराधी को गिरफ्तार ले आए व्हाइट हाउस के रैपिड रिस्पांस अकाउंट ने X पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें मादुरो दिखाई दे रहे थे। इसमें कैप्शन लिखा "अपराधी को ले जाया गया।" सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के उपाध्यक्ष, डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने इस ऑपरेशन को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि, "क्या इसका मतलब यह है कि कोई भी बड़ा देश किसी छोटे पड़ोसी देश के शासक पर मुकदमा चलाकर उसे सत्ता से हटा सकता है?" उन्होंने कहा, "कई बार हुई बैठकों में जब हमने इस बारे में बात की कि अगला पद कौन संभालेगा, क्या यह सेना होगी? क्या यह विपक्ष होगा? - तब उपराष्ट्रपति के एक संभावित उम्मीदवार होने के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई।" उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान "असाधारण" था और "हमारी सेना की दक्षता" को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "लेकिन बिना किसी स्पष्ट मिशन और अगले कदम के बारे में जानकारी के हमारे सैनिकों को खतरे में डालना वास्तव में चिंताजनक है।" https://www.bhaskar.com/international/news/world-media-on-maduros-arrest-bbc-nyt-guardian-136854986.html
ईरान में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों GenZ:सरकारी इमारत में तोड़फोड़ की, राजशाही वापस लाने की मांग; 3 लोग मारे गए ईरान में आर्थिक संकट और मंहगाई बढ़ने के कारण सरकार के खिलाफ पिछले 4 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। दक्षिणी शहर फासा में प्रदर्शनकारियों ने एक सरकारी इमारत में घुसने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने जमकर तोड़फोड़ की। ईरानी न्यूज एजेंसी मीजान के अनुसार, प्रांतीय गवर्नर कार्यालय के मुख्य दरवाजे और शीशे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को दखल देना पड़ा, जिसके बाद 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 12 पुलिसकर्मी घायल हुए। राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार इलाके में व्यापारियों और दुकानदारों ने प्रदर्शन किया। कई जगहों पर दुकानें बंद रहीं, जिससे कारोबार ठप हो गया। इसी दौरान ईरान की अर्धसैनिक बसीज फोर्स का 1 सैनिक और 2 अन्य युवाओं की मौत हुई है। इस घटना के बाद कई इलाकों में तनाव और बढ़ गया है। प्रदर्शन की तस्वीरें... ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। राष्ट्रपति बोले- विदेशी ताकतें देश में फूट डाल रही तेहरान में यूनिवर्सिटी और व्यावसायिक क्षेत्रों में शुरू हुए ये प्रदर्शन अब कई शहरों में फैल चुके हैं। कई जगहों पर बाजार बंद रहे और व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी कट्टरपंथी मौलानाओं के शासन के खात्मे और राजशाही वापस लाने की मांग कर रहे हैं। इन नारों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई पर निशाना साधा जा रहा था। कुछ वीडियो में लोग निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाते और उन्हें सत्ता सौंपने की मांग करते नजर आए। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने हालात संभालने के लिए मोर्चा संभाला है। उन्होंने इन प्रदर्शनों के लिए विदेशी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया और देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें देश में फूट डालकर अपना फायदा निकालना चाहती हैं। इस्लामिक क्रांति के बाद खुमैनी ने ईरान में मौलाना शासन की नींव रखी ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं। ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं। इसी कारण 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है। तीन साल में सबसे बड़ा प्रदर्शन ये प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। उस समय 22 साल की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में आंदोलन भड़क गया था। उन्हें हिजाब ठीक से न पहनने के आरोप में मोरैलिटी पुलिस ने पकड़ा था। इससे पहले सोमवार को तेहरान के कुछ इलाकों में हालात काबू से बाहर होने पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को हटाया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है। ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा। कई देशों ने ईरान पर प्रतिबंध लगा रखा है... -------------------------- ये खबर भी पढ़ें... अमेरिका-इजराइल और यूरोप के साथ जंग की स्थिति में ईरान: राष्ट्रपति बोले- ये हमें घुटनों पर लाना चाहते, लेकिन अब हम पहले से ज्यादा मजबूत ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा कि उनका देश अमेरिका, इजराइल और यूरोप के साथ पूरी तरह से जंग की स्थिति में है। यह बयान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ। पूरी खबर पढ़ें... https://www.bhaskar.com/international/news/thousands-of-genz-take-to-the-streets-in-iran-to-protest-inflation-136837861.html
जापान में 50 से ज्यादा गाड़ियां आपस में टकराई:कई गाड़ियां जली, बुजुर्ग महिला की मौत, 26 घायल; बर्फीले मौसम के कारण हादसा हुआ जापान में शुक्रवार देर रात बर्फीले मौसम के कारण बड़ा सड़क हादसा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, कोहरे के कारण इलाके में विजिबिलिटी कम थी, जिसके चलते दो ट्रक आपस में टकरा गए। टक्कर के बाद एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा ब्लॉक हो गया। पीछे से आ रही गाड़ियां बर्फीली सड़क पर समय रहते ब्रेक नहीं लगा सकीं और देखते ही देखते 50 से ज्यादा गाड़ियां आपस में भिड़ गए। टक्कर के बाद गाड़ियों में आग लग गई। हादसा गुन्मा प्रान्त के मिनाकामी कस्बे में कान-एत्सु एक्सप्रेसवे पर हुआ। इसमें 77 साल की बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि 26 लोग घायल हो गए। हादसे के वक्त देश में साल के अंत और नए साल की छुट्टियों को लेकर भारी ट्रैफिक था। हादसे की 7 तस्वीरें... एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियां जलकर राख हुईं पुलिस ने बताया कि घायलों में से पांच की हालत गंभीर है। हादसे के बाद एक गाड़ी में आग लग गई। जो तेजी से फैलते हुए एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियों तक पहुंच गई। कई वाहन पूरी तरह जलकर राख हो गए हैं। दमकल कर्मियों को आग बुझाने में सात घंटे लगे आग बुझाने में दमकल कर्मियों को करीब सात घंटे लगे। पुलिस जांच, मलबा हटाने और सड़क की सफाई के चलते एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्से अभी भी बंद हैं। यहां शुक्रवार देर रात भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन छुट्टियों के कारण लोग घूमने निकल रहे थे। https://www.bhaskar.com/international/news/more-than-50-vehicles-collided-in-japan-136785042.html
बांग्लादेश के स्कूल कॉन्सर्ट में भीड़ का हमला:ईंट-पत्थर और कुर्सियां फेंकी, स्कूली छात्र समेत 20 घायल; जबरन घुसने से रोकने पर दंगा बांग्लादेश के फरीदपुर जिले में शुक्रवार की रात डिस्ट्रिक्ट स्कूल की 185वीं एनिवर्सरी के समापन समारोह के दौरान हिंसा हो गई। समारोह में मशहूर रॉक सिंगर जेम्स (नागर बाउल) का कॉन्सर्ट होना था, लेकिन इससे ठीक पहले भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। यह घटना रात करीब 9:30 बजे हुई, जब जेम्स मंच पर आने वाले थे। आयोजकों के अनुसार, कुछ बाहरी लोग जबरन कार्यक्रम स्थल में घुसने की कोशिश कर रहे थे। रोकने पर उन्होंने ईंट-पत्थर और कुर्सियां फेंकना शुरू कर दिया और मंच की ओर बढ़ने लगे। इसके बाद प्रशासन के निर्देश पर कॉन्सर्ट रद्द कर दिया गया। घटना में 20 लोग घायल हो गए। ज्यादातर घायल स्कूल के छात्र हैं, जिन्हें सिर और हाथ-पैर में चोटें आईं। मौके पर मौजूद छात्रों और स्वयंसेवकों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, जिसके बाद हमलावर पीछे हटे। हिंसा की 3 तस्वीरें... बैंड को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला गया स्थिति बेकाबू होते देख फरीदपुर जिला प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया। रात करीब 10 बजे आयोजन समिति के संयोजक डॉ. मुस्तफिजुर रहमान शमीम ने मंच से ऐलान किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला उपायुक्त के निर्देश पर जेम्स का कॉन्सर्ट रद्द किया जा रहा है। जेम्स और उनके बैंड सदस्यों को सुरक्षा घेरे में सुरक्षित बाहर निकाला गया। किसी कलाकार को चोट नहीं लगी। वर्षगांठ कार्यक्रम के प्रचार और मीडिया उप-समिति के संयोजक राजिबुल हसन खान ने कहा, “हमने जेम्स के कॉन्सर्ट को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारियां की थीं, लेकिन इस अचानक हमले से हम सभी हैरान हैं। हमें नहीं पता कि यह हमला किसने और क्यों किया।” उन्होंने आगे कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए कार्यक्रम रोकना पड़ा। फरीदपुर जिला स्कूल इस क्षेत्र के सबसे पुराने सरकारी संस्थानों में से एक है, जिसकी स्थापना 1840 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। सांस्कृतिक संस्थान छायनाट पर भीड़ ने हमला किया, म्यूजिक इंस्टूमेंट लूटे थे हाल के समय में कई कलाकारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर इसी तरह के हमले हो चुके हैं, जिससे कलाकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने इलाके में भारी सुरक्षा तैनात की और स्थिति को नियंत्रण में लाया, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी की खबर नहीं आई। कुछ दिन पहले ढाका के प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्थान छायनाट पर भीड़ ने हमला किया। हमलावरों ने छह मंजिला इमारत में घुसकर तोड़फोड़ की, कई कमरों में आग लगा दी और लूटपाट की। संस्थान के अनुसार, म्यूजिक इंस्टूमेंट जैसे तबला, हारमोनियम, वायलिन आदि क्षतिग्रस्त हुए या लूट लिए गए, फर्नीचर तोड़ दिया गया, सीसीटीवी कैमरे नष्ट कर दिए गए और कुछ सर्वर को आग के हवाले कर दिया गया। ऐतिहासिक दस्तावेज, किताबें और कलाकृतियां भी बुरी तरह प्रभावित हुईं, जिससे संस्थान को करीब 2.2 करोड़ टका का नुकसान हुआ। भारतीय पहचान छिपाकर ढाका से निकले थे भारतीय वादक शिराज प्रसिद्ध भारतीय सारोद वादक शिराज अली खान (उस्ताद अली अकबर खान के पोते और मैहर घराने से जुड़े) 19 दिसंबर को छायनाट में प्रदर्शन करने वाले थे। हमले की खबर मिलते ही कार्यक्रम रद्द हो गया। शिराज अपनी भारतीय पहचान छिपाकर ढाका से कोलकाता लौट आए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तोड़फोड़ नहीं, बल्कि संस्कृति, कलाकारों और साझा विरासत पर हमला है। उन्होंने कहा कि कलाकारों और संगीत की सुरक्षा होने तक बांग्लादेश नहीं आएंगे। कई भारतीय कलाकारों ने कॉन्सर्ट रद्द किए ढाका में उदीची शिल्पीगोष्ठी के मुख्य कार्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया था। यह संस्था संगीत, नाटक और लोक संस्कृति को बढ़ावा देती है। हमलावरों ने इसे "भारतीय संस्कृति का प्रचारक" बताकर निशाना बनाया। इस घटना के बाद कई इंडियन क्लासिकल म्यूजिशियन उस्ताद राशिद खान के बेटे अरमान खान ने बांग्लादेश में अपने सभी कॉन्सर्ट रद्द कर दिए। उन्होंने कहा कि जहां संगीत का अपमान हो रहा हो, वहां प्रदर्शन नहीं करेंगे। कई भारतीय और स्थानीय कलाकारों ने भी सुरक्षा चिंताओं के कारण बांग्लादेश दौरा टाल दिया। https://www.bhaskar.com/international/news/mob-attacks-bangladesh-school-concert-136784849.html
अमेरिका ने नाइजीरिया में ISIS के ठिकानों पर हमला किया:ट्रम्प बोले- ISIS आतंकी कचरा, ईसाइयों की हत्या कर रहा; हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जानकारी दी है कि अमेरिका ने गुरुवार रात नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी इलाके में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ठिकानों पर शक्तिशाली और घातक हमला किया है। ट्रम्प का आरोप है कि इस इलाके में ISIS ईसाइयों को निशाना बनाकर बेरहमी से हत्या कर रहा है। ट्रम्प ने भारतीय समय मुताबिक शुक्रवार सुबह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कार्रवाई के बारे में बताया। उन्होंने ISIS आतंकियों को “आतंकी कचरा” बताते हुए लिखा कि यह समूह लंबे समय से निर्दोष ईसाइयों की हत्या कर रहा है। ट्रम्प के मुताबिक इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने कई परफेक्ट स्ट्राइक कीं। उन्होंने रक्षा मंत्रालय को अनौपचारिक रूप से “डिपार्टमेंट ऑफ वॉर” कहते हुए सेना की तारीफ की और कहा कि ऐसी सटीक कार्रवाई सिर्फ अमेरिका ही कर सकता है। ट्रम्प बोले- अमेरिका कट्टर इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका “कट्टर इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।” पोस्ट के अंत में ट्रम्प ने सेना को आशीर्वाद देते हुए क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं और कहा कि अगर ईसाइयों की हत्याएं जारी रहीं, तो आगे और भी आतंकी मारे जाएंगे। इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर सिविल लिबर्टीज एंड द रूल ऑफ लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया में जनवरी से 10 अगस्त तक धार्मिक हिंसा बढ़ने के कारण 7,000 से अधिक ईसाइयों की हत्या कर दी गई है। इन हत्याओं के बीच बोको हरम और फुलानी एक्सट्रीमिस्ट जैसे आतंकी संगठन जिम्मेदार हैं। ट्रम्प ने 2 नवंबर को हमले की धमकी दी थी ट्रम्प ने 2 नवंबर नाइजीरिया को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर नाइजीरिया में ईसाइयों की हत्या और हमले बंद नहीं हुए, तो अमेरिका तुरंत नाइजीरियाई सरकार को दी जाने वाली सभी आर्थिक और सैन्य सहायता रोक देगा। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका 'गन के साथ' नाइजीरिया में कार्रवाई करेगा और उन आतंकियों को खत्म करेगा जो ईसाइयों पर हमला कर रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अपने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के आदेश दे दिए हैं। नाइजीरिया में ईसाइयों पर हमले क्यों हो रहे नाइजीरिया की 22 करोड़ की आबादी लगभग बराबरी से मुस्लिम और ईसाई समुदाय में बंटी है। देश में बोको हराम जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन लंबे समय से हिंसा कर रहे हैं। खासकर देश के उत्तरी हिस्सों में होनी वाली हिंसा का शिकार ईसाई के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय भी होता आ रहा है। कई जगह ये हमले धार्मिक कारणों से, तो कई जगह जमीन, जातीय संघर्ष, या आतंकवादी नेटवर्क की वजह से होते हैं। अमेरिका ने 2020 में पहली बार नाइजीरिया को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाले देशों की सूची में रखा था। 2023 में यह टैग हटा लिया गया, जिसे दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने की कोशिश के तौर पर देखा गया था। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें... आज का एक्सप्लेनर:नाइजीरिया में 7 हजार ईसाई मारे, स्कूलों से लड़कियां तक किडनैप; आखिर चाहते क्या हैं इस्लामिक आतंकी, ट्रम्प स्ट्राइक की तैयारी में https://www.bhaskar.com/international/news/us-strikes-isis-targets-in-nigeria-136774613.html
हसीना बोलीं- बांग्लादेश में भारत विरोध के लिए यूनुस जिम्मेदार:उनके समर्थन से कट्टरपंथी हिंसा कर रहे, अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में बढ़ती भारत विरोधी भावना के लिए अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस को जिम्मेदार ठहराया है। ANI न्यूज एजेंसी से बात करते हुए हसीना ने भारत को बांग्लादेश का सबसे भरोसेमंद दोस्त बताया। उन्होंने कहा कि यूनुस सरकार की नीतियों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई है। अंतरिम सरकार भारत के खिलाफ बयान दे रही है और अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह बिल्कुल सही है। हसीना के मुताबिक, कुछ कट्टरपंथी ताकतें खुलकर हिंसा कर रही हैं, जिन्होंने भारतीय दूतावास, मीडिया दफ्तरों और अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। यूनुस सरकार ऐसे लोगों को संरक्षण दे रही है और यहां तक कि सजा पाए आतंकियों को भी रिहा किया गया है। कहा- बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरता दक्षिण एशिया के लिए खतरा शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश इसलिए छोड़ा ताकि और खून-खराबा न हो, न कि इसलिए कि उन्हें कानून से डर था। उनका कहना है कि आज देश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है और हिंसा आम बात बन गई है। उन्होंने कट्टर इस्लामी संगठनों के बढ़ते असर पर भी चिंता जताई और कहा कि यह न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए खतरा है। हसीना ने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार बाहर की दुनिया को उदार चेहरा दिखा रही है, लेकिन देश के अंदर कट्टरपंथियों को ताकत दे रही है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को लेकर दिए जा रहे बयानों पर हसीना ने कहा कि पड़ोसी देश को धमकाना गैर-जिम्मेदाराना है और यह बांग्लादेशी जनता की सोच नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि लोकतंत्र लौटते ही ऐसे बयान खत्म हो जाएंगे। शेख हसीना ने कहा कि जब बांग्लादेश में फिर से चुनी हुई सरकार आएगी, तब भारत के साथ रिश्ते भी पहले जैसे मजबूत और दोस्ताना हो जाएंगे। उन्होंने भारत को मिले सहयोग और मेहमाननवाजी के लिए आभार भी जताया। शेख हसीना फिलहाल बांग्लादेश नहीं लौटेंगी हसीना ने बताया कि वह अभी अपने देश वापस नहीं जाएंगी। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में उनके खिलाफ जो कार्रवाई हो रही है, वह न्याय नहीं बल्कि राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जब तक बांग्लादेश में सही सरकार नहीं बनती और अदालतें स्वतंत्र नहीं होतीं, तब तक उनकी वापसी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आप मुझसे यह उम्मीद नहीं कर सकते कि मैं अपनी राजनीतिक हत्या के लिए लौटूं। उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को चुनौती दी कि अगर उन्हें लगता है कि वे सही हैं, तो इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत हेग में ले जाएं। हसीना को भरोसा है कि कोई निष्पक्ष अदालत उन्हें निर्दोष साबित करेगी। हसीना ने उन्हें दी गई मौत की सजा को खारिज किया शेख हसीना ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह कोई न्यायिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन्हें बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है। उनका आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया और न ही अपनी पसंद के वकील रखने दिया गया। उन्होंने कहा कि इस ट्रिब्यूनल का इस्तेमाल अवामी लीग को खत्म करने के लिए किया जा रहा है। गौरतलब है कि नवंबर में बांग्लादेश की एक अदालत ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में शेख हसीना को 'मानवता के खिलाफ अपराध' का दोषी ठहराया था। लोकल मीडिया के मुताबिक, उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई है। इस मामले में पूर्व पुलिस प्रमुख और पूर्व गृह मंत्री को भी दोषी ठहराया गया है। हसीना बोलीं- यूनुस सरकार की वैधता नहीं इन सबके बावजूद शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अब भी देश के संविधान पर भरोसा है। उनका कहना है कि जब लोकतंत्र वापस आएगा और अदालतें स्वतंत्र होंगी, तब सच्चा न्याय जरूर मिलेगा। हसीना ने मौजूदा अंतरिम सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उसकी कोई लोकतांत्रिक वैधता नहीं है, क्योंकि उसे जनता ने चुना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को अस्थिरता की ओर ले जाया जा रहा है। फरवरी में होने वाले चुनावों पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि अवामी लीग पर रोक लगाकर चुनाव कराना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अवामी लीग के बिना चुनाव, चुनाव नहीं बल्कि सिर्फ ताजपोशी होगी। https://www.bhaskar.com/international/news/sheikh-hasina-vs-muhammad-yunus-bangladesh-protest-ict-verdict-136738390.html
हादी हत्या मामला- बांग्लादेश सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम:छात्र नेता बोले- हत्यारों को गिरफ्तार करो, अनिश्चितकालीन धरने की धमकी; होम एडवाइजर से इस्तीफा मांगा भारत और शेख हसीना के विरोधी बांग्लादेशी नेता उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय की मांग तेज हो गई है। इंकलाब मंच ने बांग्लादेश सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने कहा कि अगर सरकार आज शाम तक हादी की हत्या में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार नहीं करती, तो शाहबाग चौराहे पर रविवार शाम से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा। कल हादी के अंतिम संस्कार के बाद दोपहर 3 तीन बजे शाहबाग चौराहे पर हुए रैली में यह अल्टीमेटम जारी किया गया। रैली मे इंकलाब मंच ने करीब दो घंटे तक इलाके को ब्लॉक रखा। जाबेर ने होम एडवाइजर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी और मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक खुदा बख्श चौधरी से 24 घंटे के अंदर इस्तीफा देने की मांग की। जाबेर ने सरकार के सामने दो मुख्य मांगें रखीं है, जिसमें पहली, हादी की हत्या में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी, और दूसरी अवामी लीग से जुड़े कथित सिविल-मिलिट्री इंटेलिजेंस एजेंटों की गिरफ्तारी है। जाबेर बोले- हत्या के पीछे पूरा सिंडिकेट, कोई नहीं बचेगा जाबेर ने सरकार से पूछा, "आपने उस्मान हादी के हत्यारों को पकड़ने के लिए क्या किया?" उन्होंने कहा कि यह हत्या एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे पूरा एक सिंडिकेट है। जाबेर ने किसी राजनीतिक दल पर सीधे शक नहीं जताया, लेकिन कहा कि कोई भी दल संदेह से ऊपर नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हादी सिर्फ अवामी लीग के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी समस्या था। उन्होंने चेतावनी दी कि हत्यारों का बचाव करने वालों और उनका सार्वजनिक समर्थन करने वालों को भी न्याय के दायरे में लाया जाए। दावा- अवामी लीग को सत्ता में लाने की साजिश हो रही जाबेर ने आगे आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को बाधित करने और शेख हसीना की अवामी लीग को फिर से सत्ता में लाने की साजिश चल रही है। उन्होंने हादी को 'जनता की आवाज' और 'बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का प्रतीक' बताया। साथ ही, समर्थकों से शांत रहने और तोड़फोड़ से बचने की अपील की। हादी का अंतिम संस्कार हुआ हादी के जनाजे में शनिवार को लाखों लोग शामिल हुए। हादी को बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया। इससे पहले दोपहर 2:30 बजे संसद भवन के साउथ प्लाजा में जनाजे की नमाज अदा की गई। इसी दौरान हादी के भाई अबू बक्र सिद्दीकी ने सवाल उठाया कि राजधानी में दिनदहाड़े हादी को गोली मारने के बाद उसके हत्यारे कैसे फरार हो गए? हादी के अंतिम संस्कार के बाद हजारों लोगों की भीड़ ने संसद में घुसने की कोशिश की है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। यूनुस बोले- हादी हमारे दिलों में बसे वहीं, संसद में नमाज के बाद अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने भाषण दिया। उन्होंने कहा कि, “लाखों लोग आज यहां आए हैं। लोग सड़क पर लहरों की तरह उमड़ रहे हैं। लोग हादी के बारे में जानना चाहते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि हादी, हम आपको विदाई देने नहीं आए हैं। आप हमारे दिलों में बसे हैं। और हमेशा के लिए, जब तक बांग्लादेश अस्तित्व में रहेगा, आप सभी बांग्लादेशियों के दिलों में रहेंगे। इसे कोई नहीं मिटा सकता।” बांग्लादेश में हिंसा से भारतीय सेना अलर्ट पर हादी की मौत के विरोध में इंकलाब मंच और जमात के कट्‌टरपंथियों ने शुक्रवार को बेनापोल से भारत के बॉर्डर तक मार्च निकाला था। उनका कहना था कि पूर्व पीएम शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपा जाए। चटगांव में चंद्रनाथ मंदिर के बाहर कट्‌टरपंथियों ने धार्मिक नारेबाजी की। इधर भारतीय सेना भी एक्टिव हो गई है और बांग्लादेश के हालात पर नजर बनाए हुए है। ईस्टर्न कमांड प्रमुख ले. जनरल आरसी तिवारी ने गुरुवार शाम भारत-बांग्लादेश सीमा का दौरा किया है। दावा- आरोपी फैसल करीम भारत भागा उस्मान हादी की हत्या का मुख्य आरोपी फैसल करीम के भारत भागने का दावा किया जा रहा है। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, हत्यारों को ट्रांसपोर्टेशन में सपोर्ट करने वाले आरोपी सिबियन डियू और संजय चिसिम ने अदालत में इसका खुलासा किया है। बांग्लादेशी सुरक्षाबलों के मुताबिक, आरोपी फैसल करीम हादी की हत्या से एक दिन पहले गर्लफ्रेंड के साथ एक रिसॉर्ट में गया था। वहां उसने गर्लफ्रेंड को कहा था- कल कुछ ऐसा होगा, जिससे बांग्लादेश हिल जाएगा। साथ ही हादी का वीडियो भी दिखाया था। मीडिया हाउस और अवामी लीग ऑफिस को प्रदर्शनकारियों ने फूंका था हादी की हत्या के विरोध में बांग्लादेश में 18 दिसंबर को कई जगह हिंसा हुई। उस्मान हादी के समर्थकों और छात्र संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ढाका के अंदर और बाहर के कई जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम आलो के कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके अलावा, शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी के घर में तोड़फोड़ की गई और उसे आग लगा दी गई। 12 दिसंबर- हादी को बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारी उस्मान हादी को राजधानी ढाका में 12 दिसंबर को गोली मारी गई थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह रिक्शे पर जा रहे थे तभी बाइक सवार हमलावर ने उन्हें गोली मारी थी। हादी को तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, बाद में इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर रेफर किया गया था। जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमले से कुछ घंटे पहले उस्मान हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का एक मैप शेयर किया था, इसमें भारतीय इलाके (7 सिस्टर्स) शामिल थे। हादी ढाका से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले थे हादी इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे और चुनाव में ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार थे। इंकलाब मंच अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद एक संगठन के रूप में उभरा। इसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की सरकार काे गिरा दिया था। यह संगठन अवामी लीग को आतंकवादी करार देते हुए पूरी तरह खत्म करने और नौजवानों की सुरक्षा की मांग को लेकर सक्रिय रहा। यह संगठन राष्ट्रीय स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा पर जोर देता है। मई 2025 में अवामी लीग को भंग करने और चुनावों में अयोग्य ठहराने में इस संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। https://www.bhaskar.com/international/news/hadi-murder-case-24-hour-ultimatum-to-the-government-136729324.html
राहुल आज जर्मनी जाएंगे, अफसरों-भारतीय समुदाय से मिलेंगे:नेता प्रतिपक्ष की 6 महीने में 5वीं विदेश यात्रा; भाजपा ने कहा था- वे लीडर ऑफ पर्यटन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी के दौरे पर रहेंगे। वहां वे जर्मन सरकार के अफसरों और भारतीय समुदाय से मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि राहुल गांधी का पिछले 6 महीनों में यह 5वां विदेश दौरा है। इससे पहले जुलाई से लेकर सितंबर के बीच वे लंदन, मलेशिया, ब्राजील, कोलंबिया की यात्रा पर गए थे। राहुल का जर्मनी दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब देश में संसद का शीतकालीन सत्र (1 से 19 दिसंबर तक) चल रहा है। इसको लेकर भाजपा ने राहुल के जर्मनी दौरे पर निशाना साधा था। राहुल के पिछले 6 महीनों की विदेश यात्राएं... ऐसा रहेगा जर्मनी दौरे का शेड्यूल राहुल गांधी 17 दिसंबर को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में होने वाले इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (IOC) के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वे यूरोप के विभिन्न देशों से आए IOC के नेताओं से मुलाकात करेंगे। IOC ने इस दौरे को पार्टी के वैश्विक संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल बताया है। IOC ने कहा कि राहुल बर्लिन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान यूरोप में IOC के लोकल ब्रांच के सभी प्रमुख NRI मुद्दों, कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और पार्टी की विचारधारा को विस्तार देने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। IOC ऑस्ट्रिया के अध्यक्ष औसाफ खान ने कहा कि संगठन गांधी की मेजबानी कर सम्मानित महसूस कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा जैसे सीनियर नेता भी मौजूद रहेंगे। पिछले 5 साल में राहुल गांधी की विदेश यात्राएं जो विवादों में रहीं... ----------------- ये खबर भी पढ़ें... CRPF ने कहा था- राहुल गांधी सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं मानते: बिना बताए विदेश जाते हैं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने सितंबर 2025 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया था। CRPF ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर कहा था कि राहुल गांधी जनवरी से सितंबर के बीच बिना सूचना दिए 6 बार विदेश गए। इस दौरान वे इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया की यात्रा पर थे। पढ़ें पूरी खबर... https://www.bhaskar.com/national/news/rahul-gandhi-germany-visit-photos-update-vikram-duhan-congress-bjp-136673637.html
वर्ल्ड अपडेट्स:ईरान बोला- हिजबुल्लाह को इजराइल के खिलाफ समर्थन देते रहेंगे; बड़े पैमाने पर हथियार और पैसा दे रहा ईरान और लेबनान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर हिजबुल्लाह संगठन को लेकर। दरअसल, ईरान लंबे समय से हिजबुल्लाह को अपना करीबी सहयोगी मानता है और इसे इजराइल के खिलाफ “प्रतिरोध मोर्चे” का सबसे मजबूत हिस्सा बताता है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने रविवार को साफ कहा कि ईरान हिजबुल्लाह को इजराइल से मुकाबला करने में पूरी ताकत से समर्थन देता रहेगा। इसका मतलब है कि ईरान हिजबुल्लाह को हथियार, पैसा और दूसरी मदद देना जारी रखेगा, क्योंकि वह इसे क्षेत्र में इजराइल के खिलाफ अपनी रणनीति का अहम हिस्सा मानता है। ईरान इसी तरह गाजा के हमास और यमन के हूती विद्रोहियों को भी समर्थन देता है, जिसे वह “प्रतिरोध अक्ष” कहता है। दूसरी तरफ, लेबनान पर अमेरिका और इजराइल का दबाव है कि वह हिजबुल्लाह को हथियार डालने पर मजबूर करे, खासकर दक्षिणी लेबनान में जहां हिजबुल्लाह का बहुत प्रभाव है। हाल की इजराइल के साथ एक साल से ज्यादा चली लड़ाई और सीरिया में बशर अल-असद की सरकार गिरने से हिजबुल्लाह काफी कमजोर हो गया है। ईरान हिजबुल्लाह को रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन, एंटी-टैंक हथियार और एक्सप्लोसिव्स सप्लाई करता है। पहले सीरिया के रास्ते जमीन से हथियार पहुंचते थे, लेकिन 2024 में असद के गिरने के बाद यह रूट बंद हो गया। अब ईरान हवाई जहाज, समुद्री जहाज (यूरोपीय पोर्ट्स तक कवर के रूप में) और इराक के रास्ते छोटी मात्रा में हथियार भेजने की कोशिश कर रहा है। 2024 की इजरायल के साथ लड़ाई में हिजबुल्लाह के ज्यादातर हथियार नष्ट हो गए, इसलिए ईरान अब उसे फिर से हथियार देकर री-आर्म करने में लगा है। ईरान के इसी समर्थन से लेबनान नाराज है। हाल ही में वेलायती ने कहा था कि लेबनान के लिए हिजबुल्लाह का होना रोजी-रोटी से भी ज्यादा जरूरी है, जिस पर लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ राजी बहुत गुस्सा हुए। उन्होंने सोशल मीडिया पर जवाब दिया कि लेबनान के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी संप्रभुता, आजादी और अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है। ईरान ने बातचीत के लिए राजी को तेहरान बुलाया भी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। https://www.bhaskar.com/international/news/iran-says-it-will-continue-to-support-hezbollah-against-israel-provides-weapons-and-money-136673344.html
बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी को गोलियों से भूना:सिर में कई गोली मारी, सोशल मीडिया पर '7 सिस्टर्स' वाला नक्शा पोस्ट किया था बांग्लादेश में चुनाव होने में 2 महीने ही बचे है, इसी बीच ढाका में शुक्रवार दोपहर को दक्षिणपंथी युवा नेता को गोली मार दी गई। यह हमला ढाका के बिजॉयनगर में बॉक्स कल्वर्ट रोड पर करीब 2:25 बजे हुआ। शेख हसीना की विरोधी इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता और आगामी चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी हमले के समय चुनाव प्रचार कर रहे थे। पुलिस के अनुसार तीन हमलावर मोटरसाइकिल पर आए, गोली चलाकर तुरंत फरार हो गए। हादी को तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि गोली उनके सिर में फंसी हुई है और हालत बेहद नाज़ुक है। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमले से कुछ घंटे पहले उस्मान हादी ने भारत और उसके पड़ोसी देशों का एक नक्शा पोस्ट किया था। उन्होंने नक्शे में भारत की '7 सिस्टर्स' को हाईलाइट किया था। उस पोस्ट के बाद, अज्ञात बंदूकधारी ने उन्हें गोली मार दी। उस्मान हादी की सोशल मीडिया पर पोस्ट यूनुस बोले- चुनावी माहौल में ऐसी हिंसा अस्वीकार्य इस घटना पर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने गहरी चिंता जताई है। यूनुस ने चुनावी माहौल में इस तरह की हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि यह देश के शांत राजनीतिक वातावरण के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। यूनुस ने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द हमलावरों की पहचान कर कड़ी सजा दी जाए। नवंबर में हादी को मौत की धमकियां मिली थी शरीफ उस्मान हादी एक प्रमुख बांग्लादेशी राजनीतिक कार्यकर्ता, लेखक और दक्षिणपंथी इस्लामी संगठन 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता हैं। नवंबर 2025 में उन्हें फेसबुक पर 30 विदेशी नंबरों से मौत की धमकियां मिली थी। वे जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले बड़े आंदोलन के बाद उभरे एक प्रभावशाली युवा नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। हादी बांग्लादेश की सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों पर कई किताबें लिख चुके हैं, जो जुलाई प्रदर्शनों से पहले देश की सांस्कृतिक चुनौतियों पर केंद्रित हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने अवामी लीग पर छात्रों की हत्याओं का आरोप लगाया। इसके अलावा, इस्लामिक क्राइम्स ट्रिब्यूनल के शेख हसीना को मौत की सजा देने पर हादी ने इसे एक मिसाल बताया। हादी आगामी संसदीय चुनावों में ढाका-8 निर्वाचन क्षेत्र (मोटीझील, शाहबाग, रामना, पलटन और शाहजहांपुर) से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके थे। इंकलाब मंच ने शेख हसीना की सरकार गिराई थी इंकलाब मंच अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद एक संगठन के रूप में उभरा। इसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की सरकार गिरा दिया था। यह संगठन अवामी लीग को आतंकवादी करार देते हुए पूरी तरह खत्म करने और नौजवानों की सुरक्षा की मांग को लेकर सक्रिय रहा। यह संगठन राष्ट्रीय स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा पर जोर देता है। मई 2025 में अवामी लीग को भंग करने और चुनावों में अयोग्य ठहराने में इस संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चुनाव आयोग ने एक दिन पहले ही 13वें संसदीय चुनाव की तारीख का ऐलान किया था। ऐसे में यह हमला राजनीतिक हिंसा की आशंका बढ़ा रहा। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होंगे बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरउद्दीन ने गुरुवार शाम इसका ऐलान किया। यह चुनाव पूर्व पीएम शेख हसीना के तख्तापलट के डेढ़ साल बाद हो रहा है। 5 अगस्त 2024 को हुए तख्तापलट के बाद हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद से वहां पर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चल रही है। अगले साल होने वाले चुनाव में हसीना की पार्टी हिस्सा नहीं ले पाएगी। बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी अवामी लीग का पंजीकरण चुनाव आयोग ने मई 2025 में निलंबित कर दिया था। पार्टी के बड़े नेताओं को अंतरिम सरकार गिरफ्तार कर चुकी है। अवामी लीग चुनाव लड़ने और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। छात्रों की पार्टी NCP और जमात के टूटे धड़े ने मिलाया हाथ चुनाव से पहले छात्रों की राजनीतिक पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने जमात-ए-इस्लामी से टूटकर बनी अमर बांग्लादेश (AB) पार्टी और राष्ट्र संस्कृति आंदोलन के साथ मिलकर नया मोर्चा गणतांत्रिक संस्कार गठजोट बनाया है। NCP इसी साल फरवरी में बनी थी। पार्टी के छात्र नेताओं ने पिछले साल हसीना विरोधी प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। इन्हीं प्रदर्शनों के दबाव में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा कि गठबंधन दो साल की कोशिशों का नतीजा है। NCP ने 125 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची भी जारी कर दी है। पार्टी के प्रमुख चेहरे नाहिद इस्लाम ढाका-11 से चुनाव लड़ेंगे। इस सूची में 14 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो अब तक किसी भी पार्टी से सबसे ज्यादा हैं। NCP जल्द ही बाकी सीटों पर भी उम्मीदवारों के नाम घोषित करेगी। https://www.bhaskar.com/international/news/sheikh-hasinas-opponent-gunned-down-in-bangladesh-136656260.html